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बढ़ते अपराधों पर विपक्ष ने उठाये सवाल: गर्भगृह में भाजपा विधायकों का हंगामा, सत्र कल तक के लिए स्थगित

बेल में आए भाजपा के 14 विधायक निलंबित

रायपुर। प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर विधानसभा में विपक्ष ने हंगामा कर दिया। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक का नाम नहीं होने का हवाला देकर बोलने नहीं दिया गया, जिससे विपक्ष के विधायक नाराज हो गए। धरमलाल कौशिक पहले गर्भगृह में पहुंचे, उसके बाद सभी भाजपा विधायक गर्भ गृह में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यसूची में शामिल किए गए अन्य मामलों को रखने के बाद सदन की कार्रवाई कल बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी।

विधानसभा में शून्यकाल में शिवरतन शर्मा, बृजमोहन अग्रवाल ने प्रदेश में बढ़ते अपराध के स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कराने की मांग की । जनता कांग्रेस विधायक धर्मजीत सिंह ने भी स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की मांग कीै। भाजपाी विधायकों ने कहा कि साइबर क्राइम के लिए छत्तीसगढ़ सबसे सुरक्षित राज्य बन गया है। गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने शासन का पक्ष रखते हुए कहा पुलिस प्रशासन अपराधों को लेकर संवेदनशील है। सभी मामलों में गंभीरता पूर्ण कार्रवाई की गई है। अपराधियों पर कार्रवाई और विवेचना में बेहतर परिणाम आये हैं। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था खराब होने का आरोप ठीक नहीं है।

प्रदेश में अपराधों को लेकर दहशत का नहीं माहौल है। कई गंभीर मामलों में अपराधी पकड़े भी गए हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद स्थगन प्रस्ताव के ग्राह्यता पर चर्चा कराने का निर्णय लिया। विपक्ष की ओर से बृजमोहन अग्रवाल ने चर्चा में भाग लेते हुए सरकार पर हमला करते हुए कहा कि प्रदेश में माफिया राज, हत्या और चाकूबाजी की घटनाएं बेतहासा बढ़ी हैं। महिलाओं के खिलाफ भी आपराधिक घटनाओं में तेजी देखी जा रही हैं। स्थितियां गंभीर हैं, इसलिए काम रोककर चर्चा कराया जाना चाहिए।

भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ साइबर ठगों का पसंदीदा स्थान बन गया है। उन्होंने सरकारी संरक्षण में आपराधिक गतिविधियां संचालित होने का आरोप लगाया। भाजपा विधायकों के आक्रामक रुख को जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ का भी साथ मिला। जकांछ विधायक दल के नेता धर्मजीत सिंह ने कहा कि कानून व्यवस्था की स्थिति बहुत बुरी है। इस पर चर्चा कराया जाना जरूरी हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा विधायक डॉ. रमन सिंह ने कहा-प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बद से बदतर हो रही है।  मानपुर में पुलिस ने 40 लोगों के घर पर नोटिस चस्पा किया गया कि वो घर छोड़ सकते हैं। इस पर टोकते हुए वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने झीरम नक्सल हमले की याद दिलाई। अकबर ने कहा कि झीरम कांड से बड़ी आज तक कोई घटना छत्तीसगढ़ में नहीं हुई। इसके दोषी गिरफ्तार नहीं हुए और सजा नहीं मिली। हम सीबीआई जांच की हम मांग कर रहे हैं क्यों अनुमति नहीं देते। डॉ रमन सिंह ने कहा कि सबूत है बोलते थे तो अब वो क्यों सामने नहीं लाते। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने एसआईटी जांच झीरम पर बैठाई है। केंद्रीय गृह मंत्री से बात भी की, लेकिन हमें जांच का जिम्मा नहीं देते, क्यों रोका जा रहा है हमें जांच से। उधर, विपक्ष सरकार की ओर से आये जवाब से असंतुष्ट होकर नारेबाजी करने लगा। जवाब में कांग्रेस विधायक भी आक्रामक हो गये। विधायकों ने सीट से खड़े होकर विपक्ष के नेताओं और भाजपा की पूर्ववर्ती सरकार के दिनों में अपराध की घटनाओं का उल्लेख करना शुरू कर दिया। हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा को नामंजूर कर दिया। विपक्ष के विधायक चर्चा पर जोर देते रहे। उनका कहना था, इस विषय पर नेता प्रतिपक्ष को सुने बिना ही आसंदी ने फैसला दे दिया यह ठीक नहीं है। चर्चा का प्रस्ताव अस्वीकार होने के बाद आक्रोशित भाजपा विधायक वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। वेल में आए भाजपा के 14 विधायक सदन संचालन के नियम अनुसार स्वमेव निलंबित हो गए। विधानसभा अध्यक्ष ने इन विधायकों का नाम पुकारने के बाद उन्हें निलंबित कर सदन के बाहर जाने कहा, पर भाजपा विधायक बेल में पहुंचकर नारेबाजी करते रहे, जिससे कार्यवाही प्रभावित होती रही। सदन की कार्रवाई पहले पांच मिनट के लिए स्थगित की गई। पुन: शुरू होने पर कार्यसूची के सरकारी काम निपटाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सदन की कार्यवाही को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया।

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