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भाजपा नेता कोठारी के कृषि केंद्र पर छापा

पूर्व सासंद अभिषेक का है करीबी
बिना प्रमाण पत्र चल रहा था कारोबार

रायपुर(realtimes) राजंनांदगांव जिले में कृषि विभाग के अधिकारियों ने बिना कृषि व्यासाय से जुड़े एक व्यावसायिक संस्थान पर छापा मारा तो पूरे राजनांदगांव जिले में लोगों के बीच सनसनी फैल गई। जिला भाजपा कोषाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद अभिषेक सिंह के करीबी माने जाने वाले साैरभ कोठारी के कोठारी कृषि केंद्र पर ये छापा मारा गया है।

दरअसल विभाग को ये शिकायत मिली है कि भाजपा के इस प्रभावी नेता द्वारा नियम कानून कायदे को दरकिनार कर व्यावसाय का संचालन किया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि जिले में इस तरह की गड़बड़ी की शिकायतें लंबे समय से रही हैं, लेकिन भाजपा की सरकार होने के कारण अब तक भाजपा से जुडे नेता व व कार्यकर्ताओं के खिलाफ प्रशासन कार्रवाई नहीं करता था। लेकिन राज्य में सरकार बदलने के बाद अब शिकायतों पर सुनवाई व कार्रवाई प्रारंभ हो गई, इसे लेकर जबरदस्त खलबली है।

पूर्व मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह के कार्यकाल में तब के विपक्षी राजनांदगांव जिले में नकली खाद बीज के मामले उठाते रहे हैं लेकिन पिछली सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की ,इसकी वजह से जिले के किसानों को भी काफी नुकसान उठाना पड़ा है। लेकिन अब साैरभ कोठारी के खिलाफ कार्रवाई के जबाद लोगों को बदलाव का आभास हुआ है। उच्च पदस्थ सूत्रों की माने तो कोठारी के मामले पर राज्य सरकार की पूरी नजर है। जल्द ही मामले की रिपोर्ट सरकार तक आने के बाद बड़ा खुलासा सामने आ सकता है।

ये है मामला

जिला भाजपा कोषाध्यक्ष सौरभ कोठारी के गंज लाइन स्थित कोठारी कृषि केंद्र में शनिवार की दोपहर कृषि विभाग के अफसर पहुंचे। देर शाम तक विभागीय अफसरों ने दस्तावेजों की पड़ताल की। डीडीए अश्वनी बंजारा ने बताया कि जांच के दौरान स्रोत प्रमाण-पत्र अधूरे मिले हैं। इस मामले में और जांच पड़ताल की जा रही है। आने वाले समय में इसका खुलासा किया जाएगा। भाजपा सरकार में श्री कोठारी पूर्व सांसद अभिषेक सिंह के करीबी माने जाते हैं । जांच की खबर शनिवार रात शहर में फैली। हालांकि डीडीए ने कार्रवाई के संबंध में कोई जानकारी फिलहाल नहीं दी है। इधर संचालक सौरभ कोठारी का कहना है कि यह रूटीन जांच है, जो कृषि विभाग के द्वारा साल में किया जाता है। रहा सवाल स्रोत प्रमाण-पत्र का, दो तीन माह पहले ही इस संबंध में आवेदन कृषि विभाग को दिया जा चुका है। विभाग से ही लेट-लतीफी की गई, इस वजह से इसे लाइसेंस में जोड़ा नहीं जा सका है। यह विभागीय अफसरों के द्वारा लेट-लतीफी है। मेरे ही नहीं जिले के सभी कृषि केंद्रों का यही हाल है। कंपनी के द्वारा विक्रय के लिए दुकानदारों को यह प्रमाण-पत्र दिया जाता है। राज्य शासन द्वारा स्रोत प्रमाण-पत्र कंपनियों को ही जारी नहीं हुआ है तो हम कहां से इसे लाएंगे।

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