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कृषि क़ानून के विरोध में छत्तीसगढ़ के विद्यार्थी और किसान 7 को जाएंगे दिल्ली

नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों के हित में नहीं
तीन कृषि कानून आम उपभोक्ता के लिए भी खतरनाक

रायपुर। अखिल भारतीय क्रांतिकारी विद्यार्थी संगठन (एआईआरएसओ) के संयोजक टिकेश कुमार ने बताया कि  4 जनवरी सरकार किसानों के साथ चर्चा करेगी अगर इससे सकारात्मक परिणाम नहीं निकला और काले कानून की वापसी नहीं किया गया तो छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में विद्यार्थी और किसान 7 जनवरी को दिल्ली जाएंगे। केंद्र में बैठी बीजेपी की सरकार लगातार जन विरोधी कानून बना रही है। एनआरसी, सीएए, एनपीआर, नई शिक्षा नीति 2020, तीन कृषि कानून, बिजली संशोधन अधिनियम 2020 और मजदूर विरोधी चार कानून कोरोनाकाल में लेकर आई है। इस प्रकार सरकार पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने और मेहनतकश आम नागरिक को गुलाम बनाने वाले कानून बना रही है।

तीन कृषि कानून को वापस लेने की मांग को लेकर देशभर के किसान दिल्ली की सीमा पर डटे हुए हैं। आज किसान आंदोलन को डेढ़ महीने होने को है फिर भी सरकार लगातार किसानों की नहीं सुन रही है। अगर इस काले कानून को वापस नहीं लिए गए तो अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के राज्य सचिव तेजराम विद्रोही और अखिल भारतीय क्रांतिकारी विद्यार्थी संगठन के संयोजक टिकेश कुमार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के आन्दोलनकारी दिल्ली जाएंगे। जब तक काले कानून वापस नहीं लेंगे तब तक  दिल्ली की सीमा पर किसानों के साथ छत्तीसगढ़ के लोग डटे रहेंगे।

कुमार ने कहा कि वहीं नई शिक्षा नीति 2020 विद्यार्थियों के हित में नहीं है। यह पूरी तरह पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने वाली नीति है। केंद्र की मोदी सरकार विद्यार्थी को वैज्ञानिक और तार्किक शिक्षा  से दूर कर मनुवादी और रूढ़िवादी की खाई में ढकेल रही है। नई शिक्षा नीति से शिक्षा का निजीकरण और व्यापारीकरण कर खिचड़ी पद्धति बनाने का काम हो रहा है। प्री-प्राइमरी एजुकेशन में छात्रों को समाज, संस्कृति माहौल की जानकारी दी जाएगी। इसमें आर्यभट्ट से लेकर चाणक्य तक का जिक्र है लेकिन गौतम बुद्ध और चार्वक के भौतिकवादी दर्शन का उल्लेख नहीं है। इसका मतलब मनुवादी, रूढ़िवादी शिक्षा को बढ़ावा देना है। वहीं एक विषय में डिग्री न लेकर बहु विषय में डिग्री से छात्रों को विषय चयन में भारी दिक्कत होगी। इसमें लार्ज स्केल पर मिशन चलाने की बात कही है इसके लिए काफी शिक्षक की जरूरत होगी। जिसमें स्वयंसेवक, काउंसलर और सामाजिक कार्यकर्ता चाहिए होंगे। अब ये स्वयंसेवक कौन होंगे ये साफ नहीं किया है।

उन्होंने तीन कृषि कानून के बारे में कहा कि इस कानून से किसान के साथ-साथ आम उपभोक्ता की जेब भी कटेगी। मेहनतकश आम जनता  पूंजीपतियों के पैरों तले कुचली जाएगी। सरकार मंडी को खत्म कर बड़ी-बड़ी कम्पनी को खेती-बाड़ी में कब्जा करने की छूट देने जा रही है। वहीं सरकार समर्थन मूल्य को लेकर भी स्पष्ट नहीं है। किसान पूरी तरह कर्ज में दब कर बर्बाद हो जायेंगे।

इस कानून से अब जमाखोरी को पूरी तरह से छूट दी गई है, जिससे महंगाई बढ़ेगी और आम उपभोक्ता की जेब कटेगी। देखा जाए तो पूरी तरह से जनता को बर्बाद करने वाले और पूंजीपतियों को आबाद करने वाले कानून है। इस काले कानून का पुरजोर विरोध करते हैं।

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