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खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े असंगठित उद्यमियों को मिलेगा बढ़ावा

CS ने आत्मनिर्भर भारत अभियान की राज्य स्तरीय समिति ने लिया निर्णय

रायपुर. मुख्य सचिव अमिताभ जैन की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में आत्मनिर्भर भारत अभियान योजना के क्रियान्वयन के लिए गठित राज्य स्तरीय अनुमोदन समिति की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्य सचिव ने अनुमोदन समिति के शेष सदस्यों वित्त विभाग-कृषि विभाग-कौशल विकास विभाग, ग्रामोद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के रजिस्ट्रार, आजीविका मिशन निदेशक, जिला विकास प्रबंधक नाबार्ड, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम दिल्ली, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के उप महाप्रबंधक और नेशनल कॉपरेटिव डेव्हलपमेंट के क्षेत्रीय निदेशक को योजना के संबंध में जरूरी मार्गदर्शन दिए। श्री जैन ने चयनित सूक्ष्म उद्योगों को प्रशिक्षित करके शीघ्र उत्पादन प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं। उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव श्री मनोज कुमार पिंगवा ने विस्तार से जानकारी दी।

बैठक में निर्णय लिया गया कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में कार्यरत स्वसहायता समूहों, सहकारिता समितियों, असंगठित लघु खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के उन्नयन के लिए प्रशिक्षण, तकनीक, बाजार और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए ’एक जिला-एक उत्पाद’ की थीम पर सूक्ष्म उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा। रायपुर जिले में जेम/जैली, बलौदाबाजार-भाटापारा-धमतरी-राजनांदगांव में पोहा, गरियाबंद में चिरौंजी प्रसंस्करण, महासमुंद में दुग्ध उत्पाद एवं दूध पाउडर, दुर्ग-टमाटर, कबीरधाम-गुड़, बालोद-अदरक, बेमेतरा-पपीता और टमाटर, बिलासपुर-मछली उत्पादन, कोरबा और बीजापुर-महुआ, रायगढ़ और मुंगेली़-टमाटर, जांजगीर-चांपा-चावल आधारित स्नेक्स, जगदलपुर-ईमली, दंतेवाड़ा-आम, सुकमा-ज्वार, कोदो, कुटकी, नारायणपुर-हर्रा/बहेरा, कोण्डागांव-काजू, कांकेर-सीताफल, सरगुजा-लीची, जशपुर-चाय, सूरजपुर-हल्दी, बलरामपुर-मुंगफली, कोरिया-टमाटर, गौरेला पेण्ड्रा मरवाही जिले में सीताफल के विभिन्न उत्पादों के प्रसंस्करण का कार्य किया जाएगा। छत्तीसगढ़ राज्य में 2594 सूक्ष्म औद्योगिक ईकाइयों का चयन आत्मनिर्भर भारत (प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना) के तहत किया गया है। बैठक में योजना के क्रियान्वयन के लिए तकनीकी संस्थान के रूप में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय को चिन्हांकित किया गया है। योजना के 2020-21 में क्रियान्वयन के लिए सात करोड़ 22 लाख 72 हजार रूपए के बजट प्रस्ताव का भी अनुमोदन किया गया।

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