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तमिलनाडु से 33 छत्तीसगढ़िया प्रवासी बंधुआ मजदूरों को छुड़ाया गया

रायपुर. वान मुहील संगठन को मिली जानकारी मिली कि छत्तीसगढ़ के बलोदा बाजार एवं महासमुंद जिले के रहने वाले 33 मजदूर जिनमें महिलाएं एवं बच्चे सम्मिलित हैं, को तमिलनाडु स्थित श्रीपति पेपर मिल में जबरदस्ती काम करवाया जा रहा है।

तत्काल ही वान मुहिल संगठन ने नेशनल लीगल सेल ऑथोर्टी विरुधुनगर एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर श्रीपति पेपर मिल पर छापा मारा जिसमे लगभग 33 बंधुआ मजदूर  जिनमें से 9 बच्चे , 7 महिला एवं 9 पुरुष प्रवासी मजदूरों को मुक्त करवाया गया।

तमाम मजदूरों को मानव तस्कर  कमल नागेश एवं प्रभु लाल बारिक जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं, दोनों ने मिलकर मजदूरों को झांसा दिया एवं इन मजदूर परिवारों को छत्तीसगढ़ से तमिलनाडु मानव तस्करी के जरिए ले आएं और उन्हें बताया गया कि 8 घंटे के काम का दाम ₹12000 प्रति मजदूर को भुगतान किया जाएगा परन्तु  वादे के अनुसार यहां सब कुछ उल्टा ही निकला 8 घंटे की जगह मजदूरों को 12 घंटे से ज्यादा प्रतिदिन के हिसाब से काम करना पड़ा और ₹12000 की जगह मजदूरों के नसीब में फूटी कौड़ी भी नहीं मिली।

मजदूरों को जब ऐसा एहसास हुआ कि मानव तस्कर कमल नागर एवं प्रभुलाल बारिक श्रीपति पेपर मिल के मालिक के साथ मिला हुआ है और मजदूरों से बेगारी करवा रहा है तो बंधुआ मजदूर राम कुमार निवासी जिला महासमुन्द तथा हीरा बाई निवासी जिला बालोद बाजार ने बताया कि हमे श्रीपति पेपर मिल में बनी नालियो को साफ करवाया जाता था मजदूरों को जिस काम को करवाने के लिए बुलाया गया वो काम उनको नहीं मिला। ऐसी स्थिति में मजदूरों ने वान मुहिल संगठन के साथ संपर्क किया। प्रशासन ने तमाम मजदूरों को बंधुआ गिरी के मकड़जाल से मुक्त करवाया और मजदूरों के बयान तो ले लिए किंतु मुक्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया । प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रवासी मजदूरों को उनके पैतृक गांव तक पहुंचाने के लिए एक बस की व्यवस्था की जिसमें बैठकर तमाम मजदूर छत्तीसगढ़ की ओर रवाना हो गए हैं यह मजदूर 1 दिन बाद छत्तीसगढ़ महासमुंद जिला एवं बलोदा बाजार तक पहुंच जाएंगे वर्तमान में नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर ईंरेडिकेशन ऑफ़ बोंडेड लेबर मजदूरों बकाया मज़दूरी भुगतान, मुक्ति प्रमाण पत्र, मालिक एवं ठेकेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई  के लिए संघर्षं कर रही है।  

नेशनल कैंपन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बॉन्डेड लेबर के कन्वीनर निर्मल अग्नि ने बताया की मुफ्त बंधुआ मजदूरों को यदि मुक्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया तो वो दोहरे बंधुआ मजदूर बनकर किसी अन्य राज्य में बंधुआ मजदूरी करते पुनः पाए जाएंगे इसलिए विरुधुनगर प्रशाशन एवं तमिलनाडु सरकार को कमेटी ने गुजारिश की है कि वे जल्द ही मुक्त बंधुआ मजदूरों को मुक्ति प्रमाण पत्र एवं तत्काल सहायता राशि जारी करें साथ ही छत्तीसगढ़ एवं तमिलनाडु की सरकार को संगठन ने पत्र भेजकर जल्द ही माइग्रेंट लेबर पॉलिसी बनाने  करने के लिए  निवेदन किया है ताकि मजदूरों को मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी के चक्र में फंसने से बचाया जा सके।

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