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कोरोना टीकाकरण के लिए की जा रही तैयारी

प्राथमिकता के आधार पर विभाग के लोगों का तैयार किया जा रहा डेटा

दुर्ग। कोरोना वायरस वैक्सीन के जल्द आने की उम्मीद पर केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से निगरानी के लिए समितियां बनाने को कहा है। वैक्सीन के लिए कोल्ड चैन से लेकर उसे सुदूर और जटिल इलाकों तक पहुंचाने के लिए जिला स्तर पर समन्वय समितियां बनाने की भी सलाह दी गई है।

राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ अमर सिंह ने बताया,कोरोना टीकाकरण के लिए अभी जानकारी एकत्र करने का कार्य चल रहा है इस संदर्भ में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी सीएमएचओ के साथ एक समीक्षा बैठक भी की गयी है जिसमें उन्हें संभावित वैक्सीन लगाए जाने वाले लोगों के बारे में जानकारी एकत्र करने को कहा गया है।

उन्होंने बताया, जिन लोगों का डेटाबेस तैयार किया जा रहा है उनमें स्वास्थ्य विभाग सबसे पहले है। स्वास्थ्य विभाग में सभी सीएचसी, पीएचसी, निजी चिकित्सक और उनके स्टाफ,सीएमएचओ और उनके मातहत सभी रेगुलर व कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी, मेडिकल कॉलेज के डीन और  स्टाफ, शासकीय अस्पताल के स्टाफ, मेडिकल कॉलेज सुपरीटेंडेंट के स्टाफ इत्यादि शामिल है। इसी तरह महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी समेत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता,आंगनबाड़ी सुपरवाइजर और आंगनबाड़ी सहायिका के डेटा को तैयार किया जा रहा है इसके अलावा मितानिन का भी डेटा सहेजा जा रहा है। 28 अक्टूबर से यह डेटा तैयार किया जा रहा है जिसे फिलहाल एक्सेल शीट में भरा जा रहा है और बाद में इसे ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा।

नए साल में वैक्सीन आने की उम्मीद : डॉ गंभीर सिंह ठाकुर

सीएमएचओ डॉ गंभीर सिंह ठाकुर बताते हैं:  “कोरोना टीकाकरण के संदर्भ में अभी प्राथमिकता के आधार पर विभाग से जानकारियां संग्रह किया जा रहा है | इसमें सरकारी और निजी चिकित्सकों और उनके स्टाफ की जानकारी भी एकत्र की जा रही है । वैक्सीन कौन लगा सकता है और कौन नहीं इसकी भी जानकारी  जुटाई जा रही है। वैक्सीन नए साल तक आने  की संंभावना  है।  इसके लिए सभी जरूरी कार्य तेजी से पूर्ण किये जाने के निर्देश दिए गए हैं । ‘’

तीन समिति बनाने का निर्देश

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने इस संबंध में 26 अक्टूबर को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखा  जिसमें  उन्होंने मुख्य सचिव के नेतृत्व में राज्य संचालन समिति (एसएससी), अतिरिक्त मुख्य सचिव का प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) के नेतृत्व में राज्य कार्य बल (एसटीएफ) और जिलाधिकारियों के नेतृत्व में जिला कार्य बल गठित (डीटीएफ़) करने का सुझाव दिया है।

इसमें यह भी कहा गया कि एसएससी महीने में कम-से-कम एक बैठक करेगी। इसी तरह एसटीएफ की हर 15 दिन में बैठक होगी और डीटीएफ की बैठक हर हफ्ते होगी।

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