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बजट पर आर्थिक विशेषज्ञ रमेश वर्ल्यानी की प्रतिक्रिया

रायपुर(realtimes) बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री व प्रवक्ता एवं आर्थिक विशेषज्ञ रमेश वर्ल्यानी ने कहा है कि मोदी सरकार के आर्थिक-सर्वक्षण की रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो गया था कि मोदी सरकार देश की अर्थ-व्यवस्था की बदहाल स्थिति की अनदेखी करते हुये, अपने बजट में केवल आंकड़ो की बाजीगरी प्रदर्शित करेगी।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने कहा कि वे ‘बजट‘ नहीं, ‘बही खाता‘ पेश करेंगी। इसके पहले वित्त मंत्री ब्रीफकेस में बजट लेकर आते रहे है, लेकिन वर्तमान वित्तमंत्री महोदया उद्योगपतियों की तर्ज पर लाल कपड़े में बही खाता बांधकर संसद भवन पहुंची। बजट में सरकार की कार्ययोजनाओं का विजन होता है और बही खातों में आय व्यय का हिसाब-किताब होता है। बजट ने देश की जमीनी हालत की अनदेखी कर केवल कार्पोरेट घरानों का ध्यान रखा है। किसानों की आमदनी दुगनी करने की कोई दिशा नहीं है। 2 करोड़ नौजवानों को रोजगार देने पर बजट मौन है। विदेशों से कालाधन लाने पर बजट में कोई चर्चा नही है। नोटबंदी और जीएसटी से बेपटरी हुई अर्थव्यवस्था को उबारने के लिये सरकार ने कोई उपाय नहीं किये है। निर्माण क्षेत्र में भारी मंदी है। यूपीए सरकार में निवेश जीडीपी का 40 प्रतिशत था जो घटकर 30 प्रतिशत रह गया है। कृषि क्षेत्र में लगातार गिरावट जारी है। बेरोजगारी दर पिछले चार दशकों की तुलना में उच्चत्तम स्तर पर पहुंच गई है। व्यापार संतुलन में 15.4 अरब डालर का घाटा दर्ज हुआ। राजकोषीय धारा 3.8 प्रतिशत रखने की चुनौती बनी हुई है। लेकिन इन सबकी अनदेखी करते हुये वित्तमंत्री ने बजट में मोदी सरकारी की सारी पुरानी योजनाओं को दुहराने का काम किया है। बजट में देश की अर्थव्यवस्था को 2025 तक पांच ट्रिलीयन डालर तक ले जाने का सपना दिखाकर आम आदमी को भ्रमित करने का प्रयास किया गया है।

प्रवक्ता रमेश वर्ल्यानी ने बताया कि मोदी सरकार ने बजट को आम आदमी के बजाए बड़े उद्योग घरानों को समर्पित कर दिया है। मेन्यूफेक्चरिंग सेक्टर में मेगा प्रोजेक्ट को लाने का प्रयास इसी दिशा में कदम है। सार्वजनिक क्षेत्र की सभी ईकाइयों को निजी क्षेत्र में लाने की घोषणा की गई है जिसकी शुरूआत एयर इंडिया से की जायेगी। बीमा क्षेत्र में सौ प्रतिशत विदेशी निवेश और सिंगल ब्रांड रिटेल व मीडिया में विदेशी-निवेश की सीमा बढोत्तरी भी चिंतनीय है। देश के रिटेल व्यापार को उबारने के बजाए, 3 करोड़ छोटे दुकानदारों को पेंशन भरोसे जिंदगी जीने की ओर मजबूर किया जा रहा है।

प्रवक्ता रमेश वर्ल्यानी ने बताया कि 400 करोड़ टर्नओवर वाली बड़ी कंपनियों पर कार्पोरेट टैक्स 30 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया, वहीं 10 लाख रू. से अधिक सालाना आमदनी वाले मध्यम वर्ग के लोगो, जिसमें व्यापारी, प्रोफेशनल्स एवं कर्मचारी वर्ग आता है, पर 30 प्रतिशत के आय की दर यथावत् रखी गई है।

प्रवक्ता रमेश वर्ल्यानी ने कहा कि पेट्रोल-डीजल के मूल्य अंर्तराष्ट्रीय बाजार की तुलना में वैसे ही उच्चत्तम स्तर पर है, उसमें 1 रू. प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी किये जाने से आम आदमी पर बोझ बढ़ेगा। परिवहन लागत बढ़ने से उपभोक्ता वस्तुएं की महंगाई की मार आम आदमी पर पड़ेगी। मोदी सरकार के बजट से देश का नौजवान किसान, मजदूर, व्यापारी, महिलायें एवं आमजन अपने को ठगा हुआ महसूस कर रहे है।

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