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राजकीय सम्मान के साथ होगा Paswan का अंतिम संस्कार, प्रसाद करेंगे केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व

नयी दिल्ली। केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा और केंद्रीय कानून एवं विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद पटना में होने वाले अंतिम संस्कार में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करेंगे। एक आधिकारिक बयान तथा सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पासवान के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनके जाने से राष्ट्र ने एक प्रतिष्ठित नेता, उत्कृष्ट सांसद और सक्षम प्रशासक खो दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई मंत्रिमंडल की बैठक में दो मिनट का मौन रखा गया और पासवान के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए एक प्रस्ताव भी पारित किया गया। सूत्रों के अनुसार, बैठक में फैसला किया गया कि प्रसाद दिवंगत नेता के अंतिम संस्कार में भारत सरकार और केंद्रीय मंत्रिमंडल का प्रतिनिधित्व करेंगे।

प्रस्ताव में कहा गया, ''केंद्रीय मंत्रिमंडल उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करता है। उनके निधन से राष्ट्र ने एक प्रतिष्ठित नेता, उत्कृष्ट सांसद और सक्षम प्रशासक खो दिया है। एक सरकारी बयान में कहा गया कि पासवान शोषितों और वंचितों की आवाज थे तथा उन्होंने समाज के पिछड़े वर्गों के हकों की लड़ाई लड़ी। बयान के अनुसार राजकीय सम्मान के साथ पासवान का संस्कार किया जाएगा।

इसमें कहा गया, ''केंद्रीय मंत्रिमंडल सरकार और देश की तरफ से शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करता है।
पासवान ने बृहस्पतिवार शाम अंतिम सांस ली। उनके पार्थिव शरीर को पटना ले जाया जाएगा, जहां शनिवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। देश के प्रमुख दलित नेताओं में शुमार पासवान 74 वर्ष के थे। लोजपा के संस्थापक और उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पासवान कई सप्ताह से यहां के एक अस्पताल में भर्ती थे। हाल ही में उनके हृदय की सर्जरी हुई थी।

समाजवादी आंदोलन के स्तंभों में से एक पासवान बाद के दिनों में बिहार के प्रमुख दलित नेता के रूप में उभरे और जल्दी ही राष्ट्रीय राजनीति में अपनी विशेष जगह बना ली। 199० के दशक में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण से जुड़े मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करवाने में पासवान की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

खगड़िया में 1946 में जन्मे पासवान का चयन पुलिस सेवा में हो गया था लेकिन उन्होंने अपने मन की सुनी और राजनीति में चले आए। पहली बार 1969 में वह संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी की टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए। वह आठ बार लोकसभा के सदस्य चुने गए और उन्होंने कई बार हाजीपुर संसदीय सीट से सबसे ज्यादा मतों के अंतर से जीतने का रिकॉर्ड अपने नाम किया।
समाज के वंचित तबके से जुड़े लोगों के मुद्दे उठाने में सबसे आगे रहने वाले पासवान जमीनी स्तर के मंझे हुए ऐसे नेता थे, जिनके संबंध सभी राजनीतिक दलों और गठबंधनों के साथ हमेशा मधुर बने रहे। पांच दशक लंबे राजनीतिक करियर में वह हमेशा केन्द्र की सभी सरकारों में शामिल रहे।(एजेंसी)

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