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काबिज वन भूमि का नहीं मिला पट्टा, ग्रामीण चला रहे हैं जोतो-जीतो अभियान

जन संगठन एकता परिषद का प्रयास
आदिवासियों को किया जा रहा है जागरूक

सरगुजा। प्रदेश भर में वन अधिकार अधिनियम के तहत वन भूमि पर काबिज लाखों लोगों ने पट्टे के लिए सरकार के समक्ष दावा किया था, काफी लोगों को पट्टे मिले भी, मगर बड़ी संख्या में लोगों के आवेदन निरस्त कर दिए गए, वहीं कई लोगों को काबिज जमीन से काफी कम का पट्टा दिया गया। इसके विरोध में जन संगठन एकता परिषद से जुड़े लोग जोतो-जीतो अभियान चला रहे हैं। इनके द्वारा संबंधित ग्रामीणों से उनके द्वारा काबिज पूरी वनभूमि पर खेती कराई जा रही है, साथ ही शासन के समक्ष जमीन का पट्टा देने की मांग की जा रही है। संगठन द्वारा इसके अलावा श्रम दान से जल श्रोत तैयार कर ग्रामीणों को खेती-बाड़ी के लिए जागरूक किया जा रहा है।

सन 2005 से पूर्व से वनभूमि पर काबिज आदिवासियों और अन्य लोगों को जमीन का पट्टा दिलाने के लिए ही वन अधिकार अधिनियम लागू किया गया। कानून पारित होने के सालों बाद एक लंबी प्रक्रिया के तहत लोगों को जमीन के पट्टे दिए गए, मगर लोगों की शिकायत आज भी है कि उनके दावे के बावजूद काबिज पूरी जमीन का पट्टा नहीं दिया गया, जबकि एक परिवार को अधिकतम 10 एकड़ जमीन का पट्टा दिया जाना है। वहीं काफी लोगों को पात्र होने के बावजूद काबिज जमीन का पट्टा ही नहीं दिया गया। ऐसे लोगों की मदद एकता परिषद की सहयोगी संस्था ‘प्रयोग’ द्वारा की जा रही है। इनका जोतो-जीतो अभियान रंग ला रहा है।  सरगुजा जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर है मैनपाट विकास खंड का ग्राम पंचायत कोठ, जिसके आश्रित ग्राम बगढोढा में विशेष जनजाति के पहाड़ी कोरवा परिवार निवासरत हैं। यहां के  कोरवा आदिवासियों को उनके द्वारा काबिज वनभूमि का पट्टा तो दिया गया, मगर शिकायत है कि वे जितनी जमीन पर काबिज हैं उतने का पट्टा नहीं दिया गया। इसकी शिकायत की गई मगर इस बीच वनपाल ने यहाँ आकर शेष बची भूमि पर वृक्षारोपण कराए जाने की बात कही, जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया और गांव में एक बैठक बुलाई। यहां प्रयोग संस्था की इकाई के प्रमुख हरि यादव के नेतृत्व में सभी ग्रामीणों ने तय किया कि वे जोतो-जीतो अभियान चलाएंगे और कोरवाओं को उनके हक की जमीन और कब्जा दिलाएंगे। इसी के तहत सभी ग्रामीण संबंधित भूभाग पर पहुंचे और उन नौ कोरवा आदिवासियों द्वारा काबिज पूरी जमीन पर हल चलाया, जिसमें उनका कब्जा था। मौके पर ही पूरी जमीन पर रामतिल के बीज बोए गए।

जेल की हवा खिलाने की धमकी

ग्रामीणों के जोतो-जीतो अभियान के दौरान वहां वनपाल भी मौजूद था, जो जाते-जाते धमकी देता गया कि कल तुम सब लोग जेल की सलाखों के पीछे होगे। ग्रामीण इसके लिए भी तैयार थे, मगर इस वाकये के बाद न तो वनपाल आया और न ही कोई बड़ा अधिकारी। हरि यादव ने बताया कि अगस्त के महीने में ग्राम सभा होनी थी मगर कोरोना संक्रमण के चलते सभा नहीं हुई। उनकी योजना ग्रामसभा में कोरवाओं की शेष बची जमीन का भी पट्टा दिलाने का प्रस्ताव पारित करने की थी। अब सभी ग्रामीण ज्ञापन तैयार कर जिला प्रशासन और वन मंडलाधिकारी को सौंपेंगे और कोरवा आदिवासियों को उनकी शेष भूमि का भी पट्टा देने की मांग करेंगे। एकता परिषद के बैनर तले इसी तरह अनेक गांवों में जोतो-जीतो अभियान चलाया जा रहा है और वन अधिकार अधिनियम के तहत आदिवासियों को उनके द्वारा काबिज जमीन का पट्टा दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।

खेतों को नहर से जोड़ा नाले तक, सैकड़ों एकड़ भूभाग में हो रही है खेती

सरगुजा के ग्राम पंचायत कोठ में ही ग्रामीणों ने श्रमदान से छोटी नहर तैयार की है। इस नहर से यहां के बारहमासी नाले को जोड़ दिया गया है। इसका लाभ पंचायत के आश्रित मोहल्ले भाठाकोना, सरना टिकरा, आरासरी और कापापारा के लगभग 500 किसान उठा रहे हैं और 200 हेक्टयर भूमि पर खेती-बाड़ी कर रहे हैं।

अनाज बैंक से उधार पर देते हैं अन्न

सरगुजा जिले में एकता परिषद के कार्यकर्ताओं के प्रयास से 20 गांवों में महिला समुहों का गठन भी किया गया है। इनकी महीने में दो बार बैठक होती है, और सभी सदस्य एक रुपया और आधा किलो अनाज लाकर देते हैं। इससे इन्होंने अनाज बैंक तैयार किया है, और जरूरतमंद सदस्य को उधार पर अनाज देते हैं, इसके एवज में इस बैंक को 5 प्रतिशत ब्याज देना होता है। इसी तरह एकत्र पैसों को अपने सदस्यों को ही 5 प्रतिशत ब्याज पर ऋण दिया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों के बीच बचत की प्रवृत्ति को बढ़ाना भी है।

लॉक डाउन में चलाया फूड फ़ॉर वर्क अभियान

एकता परिषद से जुड़ी प्रयोग सामाजिक संस्था द्वारा लॉक डाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों और बेकारी से जूझ रहे ग्रामीणों के लिए श्रमदान की मुहिम चलाई गई। इसके तहत तालाब गहरीकरण, सड़क निर्माण, नाले और नहर के निर्माण सहित अनेक कार्यों में श्रमदान कराया गया। इसके एवज में सभी को अनाज का किट दिया गया। ये अभियान छत्तीसगढ़ के 11 जिलों सहित देश के चार राज्यों के 50 जिलों के 122 गांवों में चलाया गया और 4000 परिवारों को काम के बदले अनाज दिया गया । प्रयोग सामाजिक संस्था द्वारा यह अभियान यूरोपियन यूनियन और वेल्ट हंगर हिल्फे, नई दिल्ली के सहयोग से चलाया गया।

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