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डिजीटल मीडिया का उपयोग दोगुना, सोने-उठने का समय भी बदल गया लॉकडाउन में

• एम्स के फिजियोलॉजी विभाग ने लॉकडाउन के प्रभावों का सर्वे के माध्यम से किया अध्ययन
• जर्नल ऑफ पब्लिक हैल्थ के नए अंक में प्रकाशित किया गया है एम्स रायपुर के सर्वे को

रायपुर. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, रायपुर के फिजियोलॉजी विभाग के तत्वावधान में किए गए एक ऑनलाइन सर्वे में कोविड-19 के बाद लगाए गए लॉकडाउन के दौरान रात को सोने और सुबह उठने एवं भोजन के समय में कई मूलभूत परिवर्तन पाए गए। मोबाइल, टीवी और लैपटॉप जैसे डिजिटल मीडिया के दो गुना से भी अधिक प्रयोग से  लाइफस्टाइल संबंधी कई परिवर्तन देखने को मिले।

विभागाध्यक्ष प्रो. रामाजंन सिन्हा, बबिता पांडे और मीनाक्षी सिंह के निर्देशन में ऑनलाइन सर्वे किया गया जिसमें 1511 प्रतिभागियों ने भाग लिया। सभी की आयु 18 वर्ष या इससे अधिक थी। इस सर्वे में पाया गया कि लॉकडाउन के दौरान रात को सोने के समय में लगभग 38 मिनट और उठने के समय में लगभग 51 मिनट की देरी होने लगी। लॉकडाउन से पूर्व प्रतिभागियों का औसतन सोने का समय 10 से रात 12 बजे का था जो लॉकडाउन के दौरान रात दो से प्रातः चार बजे तक पहुंच गया। इस दौरान सभी प्रतिभागियों की नींद का समय भी बढ़ गया। कुछ प्रतिभागियों में तो यह 10 से 12 घंटे तक पाया गया।

सर्वे में पाया गया कि लॉकडाउन के दौरान सुबह का नाश्ता, दोपहर और शाम के खाने में क्रमशः 58, 32 और 15 मिनट तक की देरी होने लगी। प्रो. सिन्हा का कहना है कि डिजीटल मीडिया की कृत्रिम रोशनी की वजह से सोने के समय में प्रतिकूल परिवर्तन होता है। सर्वे में इसी तथ्य को इंगित किया गया है। सर्वे जर्नल ऑफ पब्लिक हैल्थ रिसर्च 2020 के नए अंक में प्रकाशित हुआ है। निदेशक प्रो. नितिन एम. नागरकर ने सभी शोधकर्ताओं को शोधपत्र के प्रकाशन पर बधाई दी है और कहा है कि एम्स रायपुर इसी प्रकार के कई अन्य शोध कोविड-19 रोगियों के प्रबंधन, विभिन्न दवाइयों के अनुप्रयोगों और सामाजिक और आर्थिक स्तर पर पड़ रहे प्रभावों के अध्ययन के लिए कर रहा है। इनसे भी कई उपयोगी जानकारियां मिलने की उम्मीद है।

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