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स्कूल फीस का विरोध, पालकों ने किया प्रदर्शन

स्कूल संचालकों की जारी है मनमानी, फीस को लेकर पालकों का विरोध तेज

रायपुर. फीस को लेकर स्कूल संचालकों की बढ़ती मनमानी का पलकों ने विरोध तेज कर दिया है। प्रदेश के अलग अलग शहरों में छात्र पालक संगठनों के लोग शासन के समक्ष शिकायत प्रस्तुत करते हुए फीस माफी की मांग  कर रहे हैं। वहीं स्कूल संचालकों ने फीस नहीं पटाने पर 8 सितंबर से ऑनलाइन पढ़ाई बंद करने की चेतावनी दी है।

राजधानी रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में होली क्रॉस स्कूल, बैरन बाजार, में पढ़ने वाले बच्चों के परिजन शिकायत लेकर पहुंचे हुए थे। यहाँ पता चला कि किसी स्टाफ के कोरोना पॉजिटिव निकल जाने के चलते ये कार्यालय 5 दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। पालकों ने बताया कि उनसे सत्र के प्रारंभ से लेकर अब तक की फीस मांगी जा रही है, जबकि तब ऑनलाइन कक्षाएं भी अच्छी तरह शुरू नहीं हुई थीं, वहीं साल के शुरू में लिया जाने वाला एकमुश्त शुल्क भी फीस में जोड़कर किश्तों में मंगा जा रहा है। पालकों ने बताया कि स्कूल का स्टाफ भी उनसे बदतमीजी से पेश आ रहा है। वे जब स्कूल पहुंचे तब उन्हें कोरोना के बहाने रोक दिया गया, जबकि फीस पटाने आये पालकों को रोका तक नहीं गया।

यहाँ अपनी फरियाद लेकर पहुची बिंदु मोल नाम की महिला ने बताया कि वो परित्यक्ता है और उसकी अपील पर होलीक्रोस स्कूल, बैरन बाजार के फादर ने पिछले साल उसके दो बच्चों की फीस माफ करने का आदेश दिया था, मगर आज प्रबंधन द्वारा बीते वर्ष से लेकर अब तक की फीस एकमुश्त जमा करने और टी सी लेकर जाने को कहा जा रहा है।

होलीक्रोस स्कूल, बैरन बाजार से संबंधित इन पालकों को प्रिंसीपल से मिलने नहीं दिया गया और उल्टे बाहर का रास्ता दिखा दिया गया, इन्हें समर्थन देने पहुंचे छत्तीसगढ़ छात्र – पालक संघ के अध्यक्ष नजरुल खान ने बताया कि स्कूलों की फीस विधिवत तरीके से पालक-शिक्षक संगठन की बैठक में अनुशंसा के बाद डी ई ओ की अनुमति से तय की जाती है, मगर यह प्रक्रिया किसी भी स्कूल प्रबंधन द्वारा अपनायी नहीं जाती है। ऐसे में स्कूल द्वारा मनमाने ढंग से मांगी जा रही फीस पालक कैसे पटाएँगे। वैसे भी लॉक डाउन में  बेरोजगारी से त्रस्त पालक फीस पटाने में सक्षम भी नहीं हैं।

नजरुल खान ने यह भी बताया कि स्कूल संचालकों के संगठन ने 8 सितंबर तक फीस नहीं पटाये जाने की स्थिति में ऑनलाइन पढ़ाई बंद करने की चेतावनी दी है। नियम के मुताबिक फीस नहीं पटाने के चलते कोई भी स्कूल प्रबंधन न तो पढ़ाई रोक सकता है और न ही बच्चे को स्कूल से निकाल सकता है। फिलहाल उनका संगठन देख रहा है कि इस मामले में शासन स्कूलों के खिलाफ शिक्षा के अधिकार कानून के तहत कार्यवाही करता है या नहीं, अन्यथा पालक आंदोलन के लिए तैयार हैं।

गौरतलब है कि स्कूल फीस को लेकर हाइकोर्ट में अलग-अलग वाद दायर किया गया है, इनमें से कुछ के फैसले आना अभी बाकी है, इसमें प्रमुख मांग ये है कि ट्यूशन फीस की सही ढंग से व्याख्या की जाए, तभी स्कूलों में फीस पटा पाना संभव होगा, और स्कूल संचालकों की मनमानी पर रोक लग सकेगी।

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