राष्ट्रपति मुर्मु ने की बस्तर दशहरा की सराहना, मांझियों का मानदेय बढ़कर 5 हजार रुपए

जगदलपुर में बोलीं- बस्तर दशहरा सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक; CM साय ने कहा- माओवाद से मुक्त बस्तर में अब नवनिर्माण की बारी
रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शुक्रवार को जगदलपुर में विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल हुईं।
उन्होंने बस्तर की अनूठी परंपराओं, जनजातीय संस्कृति और सामूहिक आस्था की सराहना करते हुए कहा कि करीब 75 दिनों तक चलने वाला यह उत्सव सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक मूल्यों का जीवंत प्रतीक है।
इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि माओवाद से मुक्त बस्तर में अब नवनिर्माण और विकास की बारी है। वहीं, राज्य सरकार ने मांझियों का मासिक मानदेय 2 हजार से बढ़ाकर 5 हजार रुपए और चालकी का मानदेय 1500 से बढ़ाकर 3500 रुपए कर दिया है।
मुरिया दरबार को बताया लोकतंत्र का उदाहरण
राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर दशहरा में विभिन्न समुदायों के लोग अपनी पारंपरिक जिम्मेदारियां निभाते हैं। रथ निर्माण से लेकर पूजा-अनुष्ठान तक सभी की भागीदारी इस उत्सव को विशिष्ट बनाती है।
उन्होंने मुरिया दरबार को जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था का उत्कृष्ट उदाहरण बताया, जहां समाज के प्रतिनिधि मिलकर समस्याओं पर चर्चा करते हैं और समाधान तलाशते हैं।
उन्होंने जनजातीय युवाओं की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने और उन्हें खेल, शिक्षा व उद्यमिता के बेहतर अवसर देने पर जोर दिया। राष्ट्रपति ने प्रकृति संरक्षण को जनजातीय जीवन दर्शन का अभिन्न हिस्सा बताते हुए जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने की अपील भी की।
बस्तर में विकास की नई राह: CM साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन जनजातीय संस्कृति और प्रतिभाओं को राष्ट्रीय पहचान दिला रहे हैं। सरकार सड़क, रेल, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार पर काम कर रही है। नियद नेल्लानार योजना के जरिए दूरस्थ क्षेत्रों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है।
परंपरागत प्रतिनिधियों का बढ़ा मानदेय
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि मांझियों और चालकी का मानदेय बढ़ाने का निर्णय उनकी सांस्कृतिक भूमिका के सम्मान के लिए लिया गया है। इससे बस्तर की परंपराओं को संरक्षित करने वाले प्रतिनिधियों को आर्थिक संबल मिलेगा।
राष्ट्रपति ने बस्तर दशहरा की परंपराओं को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए बस्तरवासियों के उज्ज्वल भविष्य और छत्तीसगढ़ की प्रगति की कामना की।



