Sensex (सेंसेक्स) क्या है? शेयर बाजार चढ़ने-गिरने का असली मतलब क्या है? - realtimes
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Sensex (सेंसेक्स) क्या है? शेयर बाजार चढ़ने-गिरने का असली मतलब क्या है?

रूपया कहां से आता है और गायब होकर किसके पास पंहुचता है, समझें खेल

अखबारों और दीगर समाचार माध्यम से हम रोजाना ये खबरें देखते हैं कि आज शेयर बाजार में तेजी आई और वह अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। फिर ये खबरें आती हैं कि शेयर बाजार में भारी गिरावट आई और निवेशकों के कई लाख करोड़ रुपये डूब गए। बहरहाल, पिछले करीब साल भर से हम देख रहे हैं कि शेयर बाजार के उठने से ज्यादा गिरने की खबरें ही नजर आ रही हैं। जो लोग शेयर बाजार में निवेश करते हैं और इसके बारे में थोड़ा-बहुत जानते समझते होंगे। लेकिन दूसरे आम लोग, जिनका इससे कोई खास लेना-देना नहीं है, वे इस बारे में पूरी तरह जान नहीं पाते हैं। यह सारा कारोबार जिस माध्यम से चलता है, उसे सेंसेक्स कहा जाता है। हम एक्सप्लेनर के माध्यम से जानेंगे कि यह क्या है, किस तरह काम करता है और शेयर बाजार के उठने-गिरने का क्या मतलब है। इस कारोबार में निवेशकों के एक दिन में लाखों करोड़ रुपये डूबने की खबरों का क्या अर्थ है? क्या सचमुच रुपये डूब जाते हैं या कहानी कुछ और है? रुपया आता कहां से है और गायब हुआ तो पंहुचता किसके पास है। सेंसेक्स लफ्ज़ बहुत छोटा है, लेकिन इसका मतलब बहुत बड़ा। और पहले ही ये डिस्क्लेमर या सुझाव देते चले, कि हम किसी को शेयर बाजार में पैसा लगाने की कोई सलाह नहीं दे रहे है, ये काम आप किसी जानकार निवेश सलाहकार की मदद से करें।


1. सेंसेक्स क्या है?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि सेंसेक्स शेयर बाजार का पूरा कारोबार नहीं है। यह बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख शेयर बाजार सूचकांक है। इसमें अलग-अलग क्षेत्रों की 30 प्रमुख कंपनियों के शेयर शामिल होते हैं।

सेंसेक्स को भारतीय शेयर बाजार की चाल समझने के एक महत्वपूर्ण संकेतक के रूप में देखा जाता है। इसकी शुरुआत 2 जनवरी 1986 को हुई थी। इसका आधार मूल्य 100 रखा गया था।

लेकिन सवाल है कि 30 कंपनियों के शेयरों से पूरे शेयर बाजार की स्थिति का अंदाजा कैसे लगाया जा सकता है?

दरअसल, इन कंपनियों का चयन बाजार में उनके आकार, शेयरों के कारोबार और दूसरे निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाता है। ये कंपनियां बैंकिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, वाहन, उपभोक्ता उत्पाद और दूसरे प्रमुख क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

इन कंपनियों के शेयरों की कीमतों में होने वाले बदलाव के आधार पर सेंसेक्स का स्तर ऊपर या नीचे जाता है। हालांकि, सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियां पूरे शेयर बाजार की सभी कंपनियों का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं। इसलिए सेंसेक्स की चाल को हर कंपनी या हर निवेशक के प्रदर्शन के बराबर नहीं माना जा सकता।

2. सेंसेक्स कैसे काम करता है?

सेंसेक्स को समझने के लिए पहले शेयर बाजार में शेयर की कीमत और कंपनी के बाजार मूल्य के बीच का संबंध समझना होगा।

मान लीजिए, किसी कंपनी के एक शेयर की कीमत 100 रुपये है और कंपनी के कुल 10 करोड़ शेयर जारी हैं। इस आधार पर कंपनी का कुल बाजार पूंजीकरण 1,000 करोड़ रुपये होगा।

अब यदि शेयर की कीमत बढ़कर 110 रुपये हो जाती है, तो कंपनी का कुल बाजार पूंजीकरण बढ़कर 1,100 करोड़ रुपये हो जाएगा। यानी कंपनी के बाजार मूल्य में 100 करोड़ रुपये की वृद्धि दिखाई देगी।

लेकिन सेंसेक्स की गणना केवल शेयर की कीमतों को जोड़कर या 30 कंपनियों की कीमतों का साधारण औसत निकालकर नहीं होती।

इसकी गणना में कंपनियों के फ्री-फ्लोट बाजार पूंजीकरण को ध्यान में रखा जाता है। इसका अर्थ है कि कंपनी के सभी जारी शेयरों के बजाय उन शेयरों को महत्व दिया जाता है, जो सामान्य कारोबार के लिए बाजार में उपलब्ध हैं। प्रवर्तकों और कुछ रणनीतिक हिस्सेदारों के पास मौजूद ऐसे शेयर, जो सामान्य रूप से कारोबार के लिए उपलब्ध नहीं होते, इस गणना में शामिल नहीं किए जाते।

इसके बाद इन कंपनियों के फ्री-फ्लोट बाजार पूंजीकरण के आधार पर निर्धारित गणना पद्धति से सेंसेक्स का स्तर निकाला जाता है।

यही वजह है कि बड़ी कंपनियों के शेयरों में बदलाव का सेंसेक्स पर अधिक असर पड़ सकता है, जबकि अपेक्षाकृत कम भार वाली कंपनी के शेयर में उतार-चढ़ाव का प्रभाव कम हो सकता है।

3. सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियां कौन चुनता है?

सेंसेक्स में शामिल कंपनियों की सूची स्थायी नहीं होती। बाजार और कंपनियों की स्थिति बदलने के साथ इस सूची की समय-समय पर समीक्षा की जाती है।

BSE की इंडेक्स संबंधी व्यवस्था में कंपनियों के बाजार पूंजीकरण, शेयरों की उपलब्धता और कारोबार, वित्तीय स्थिति तथा अन्य निर्धारित मानकों पर विचार किया जाता है।

इसका उद्देश्य ऐसे सूचकांक को बनाए रखना है, जो भारतीय शेयर बाजार की प्रमुख कंपनियों के प्रदर्शन की उपयोगी तस्वीर प्रस्तुत कर सके।

यदि कोई कंपनी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं रहती और दूसरी कंपनी बेहतर पात्रता हासिल करती है, तो समीक्षा के दौरान सूचकांक में बदलाव किया जा सकता है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि सेंसेक्स से बाहर होने वाली कंपनी का कारोबार बंद हो गया या उसके शेयर बेकार हो गए। इसका मतलब केवल इतना है कि वह कंपनी उस सूचकांक में शामिल रहने के निर्धारित मानकों पर अब उसी तरह खरी नहीं उतर रही है।

इसी तरह सेंसेक्स में शामिल होने का अर्थ भी यह नहीं है कि किसी कंपनी के शेयर में निवेश करना हमेशा फायदे का सौदा होगा। कंपनी के शेयर की कीमत बाजार की परिस्थितियों, कारोबार के नतीजों और निवेशकों की अपेक्षाओं के अनुसार घट-बढ़ सकती है।

4. सेंसेक्स और निफ्टी में क्या अंतर है?

शेयर बाजार की खबरों में सेंसेक्स के साथ निफ्टी का नाम भी अक्सर सुनाई देता है। दोनों शेयर बाजार की चाल समझने वाले प्रमुख सूचकांक हैं, लेकिन इनका संबंध अलग-अलग स्टॉक एक्सचेंजों से है।

सेंसेक्स, BSE का प्रमुख सूचकांक है। इसमें 30 प्रमुख कंपनियों के शेयर शामिल होते हैं।

दूसरी ओर, निफ्टी 50 नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का प्रमुख सूचकांक है। इसमें 50 कंपनियों के शेयर शामिल होते हैं।

दोनों सूचकांकों की कंपनियों की सूची और उनकी गणना के नियम अलग हैं। हालांकि, दोनों भारतीय शेयर बाजार की बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन का संकेत देते हैं।

इसलिए किसी दिन सेंसेक्स और निफ्टी में एक जैसी दिशा दिखाई दे सकती है, लेकिन दोनों में अंकों या प्रतिशत के बदलाव की मात्रा अलग हो सकती है।

एक बात और समझने की है। सेंसेक्स 500 अंक चढ़े और निफ्टी 150 अंक चढ़े, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि सेंसेक्स का प्रदर्शन निफ्टी से बेहतर रहा। दोनों सूचकांकों का शुरुआती स्तर, गणना पद्धति और अंकों का पैमाना अलग है। तुलना करने के लिए प्रतिशत बदलाव और संबंधित अवधि को देखना अधिक उपयोगी होता है।

5. सेंसेक्स बढ़ने और गिरने का क्या मतलब है?

जब खबर आती है कि सेंसेक्स में तेजी आई है, तो इसका अर्थ है कि उसकी गणना में शामिल कंपनियों के शेयरों के भाव और उनके भार के आधार पर सूचकांक का स्तर बढ़ा है।

इसके उलट सेंसेक्स में गिरावट का अर्थ है कि गणना में शामिल कंपनियों के शेयरों के प्रदर्शन के आधार पर सूचकांक का स्तर नीचे आया है।

लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात है। सेंसेक्स बढ़ने का मतलब यह नहीं कि बाजार की सभी कंपनियों के शेयर बढ़े हैं। इसी तरह सेंसेक्स गिरने का मतलब यह भी नहीं कि हर कंपनी के शेयर गिरे हैं।

किसी दिन सेंसेक्स की कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी हो सकती है, जबकि अनेक छोटी कंपनियों के शेयर गिर रहे हों। इसके उलट भी हो सकता है।

बाजार में बदलाव के पीछे कई कारण हो सकते हैं। कंपनियों के वित्तीय नतीजे, ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदें, महंगाई, देश और दुनिया की आर्थिक परिस्थितियां, युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री जैसे कारक शेयरों की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।

इसलिए सेंसेक्स बाजार की दिशा समझने का महत्वपूर्ण संकेतक है, लेकिन इसे बाजार की हर गतिविधि का पूरा विवरण नहीं माना जा सकता।

6. निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये डूबने की खबर का क्या मतलब है?

अब उस सवाल पर आते हैं, जो आम लोगों को सबसे ज्यादा उलझाता है।

अखबारों में खबर आती है कि शेयर बाजार में गिरावट से निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये डूब गए। इसे पढ़कर लगता है कि इतनी बड़ी रकम कहीं से गायब हो गई। लेकिन इसका अर्थ समझने के लिए बाजार पूंजीकरण की अवधारणा जानना जरूरी है।

मान लीजिए, किसी कंपनी के शेयरों का कुल बाजार मूल्य एक दिन पहले 10,000 करोड़ रुपये था। अगले दिन उसके शेयर की कीमतों में गिरावट आ गई और बाजार मूल्य घटकर 9,000 करोड़ रुपये रह गया।

इस स्थिति में कंपनी का बाजार पूंजीकरण 1,000 करोड़ रुपये कम हो गया। इसका अर्थ यह नहीं है कि कंपनी के खाते से 1,000 करोड़ रुपये नकद निकल गए या उतनी ही रकम किसी दूसरे व्यक्ति के खाते में चली गई।

शेयर की कीमत मांग और आपूर्ति के आधार पर बदलती है। जब बाजार में शेयरों की कीमत नीचे आती है, तो उन कीमतों के आधार पर कंपनी का कुल बाजार मूल्य भी घट जाता है।

इसी तरह, जब सेंसेक्स में शामिल कंपनियों या व्यापक बाजार की कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में गिरावट आती है, तो खबरों में निवेशकों की संपत्ति में लाखों करोड़ रुपये की कमी का उल्लेख किया जा सकता है।

यहां बाजार मूल्य में कमी और वास्तविक नकदी के नुकसान के बीच अंतर समझना जरूरी है।

यदि किसी निवेशक ने 100 रुपये का शेयर खरीदा और उसकी कीमत गिरकर 80 रुपये रह गई, तो उसके निवेश का मौजूदा बाजार मूल्य कम हो गया। जब तक वह शेयर नहीं बेचता, तब तक यह गिरावट उसके निवेश के मूल्य में कमी है। यदि वह 80 रुपये पर बेच देता है, तो खरीद मूल्य की तुलना में उसे वास्तविक नुकसान हो जाता है, अन्य लागतों को छोड़कर।

हालांकि, निवेशक को नुकसान केवल शेयर बेचने पर ही नहीं होता। शेयर की कीमत गिरने से उसकी संपत्ति का बाजार मूल्य पहले ही कम हो चुका होता है। शेयर बेचना उस नुकसान को वास्तविक लेनदेन में दर्ज करता है।

इसलिए लाखों करोड़ रुपये के बाजार मूल्य में गिरावट को नकदी के उतने ही बड़े प्रवाह या निकासी के बराबर मानना सही नहीं है।

7. क्या सेंसेक्स गिरने से हर निवेशक को नुकसान होता है?

नहीं। सेंसेक्स की गिरावट और किसी खास निवेशक के नुकसान के बीच सीधा और एक जैसा संबंध नहीं होता।

मान लीजिए, किसी व्यक्ति ने ऐसी कंपनी के शेयर खरीदे हैं, जिसका प्रदर्शन उस दिन बाजार से बेहतर रहा। यदि सेंसेक्स गिरा भी है, तो उस व्यक्ति के शेयरों की कीमत बढ़ सकती है या उसमें अपेक्षाकृत कम गिरावट आ सकती है।

दूसरी ओर, किसी निवेशक ने उन कंपनियों में पैसा लगाया हो जिनके शेयरों में भारी गिरावट आई है, तो उसे सेंसेक्स की गिरावट से अधिक नुकसान भी हो सकता है।

निवेशक के नतीजे इस बात पर निर्भर करते हैं कि उसने किन शेयरों में निवेश किया, किस कीमत पर खरीदा, कितने समय तक निवेश रखा और उसके पोर्टफोलियो में किन कंपनियों का कितना हिस्सा है।

म्यूचुअल फंड के निवेशकों के लिए भी यही बात लागू होती है। अलग-अलग योजनाओं में अलग-अलग शेयर और दूसरी परिसंपत्तियां हो सकती हैं। इसलिए हर योजना का प्रदर्शन सेंसेक्स के बराबर नहीं होता।

यही वजह है कि केवल सेंसेक्स के आंकड़े देखकर किसी एक निवेशक के लाभ या नुकसान का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

8. आम निवेशक के लिए सेंसेक्स को समझना क्यों जरूरी है?

सेंसेक्स आम निवेशक को बाजार की बड़ी तस्वीर समझने में मदद करता है। इससे यह पता चलता है कि देश की प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन किस दिशा में जा रहा है।

लेकिन केवल सेंसेक्स के बढ़ने या गिरने के आधार पर शेयर खरीदने या बेचने का फैसला करना उचित नहीं है।

निवेशक को अपनी आर्थिक स्थिति, निवेश का उद्देश्य, समयावधि और जोखिम सहने की क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए। जिस कंपनी में निवेश करना है, उसके कारोबार, वित्तीय स्थिति और संभावित जोखिमों को भी समझना चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति केवल बाजार की सुर्खियों को देखकर निवेश करता है, तो वह बाजार की वास्तविक स्थिति को समझे बिना फैसला कर सकता है।

सेंसेक्स बाजार का संकेतक है, निवेश की गारंटी नहीं। इसका बढ़ना भविष्य में मुनाफे की गारंटी नहीं देता और गिरना यह साबित नहीं करता कि हर निवेश में नुकसान ही होगा।

सेंसेक्स बाजार की तस्वीर है, पूरी कहानी नहीं

सेंसेक्स भारतीय शेयर बाजार को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसकी चाल से देश की प्रमुख कंपनियों के शेयरों के प्रदर्शन का संकेत मिलता है। लेकिन यह पूरे बाजार की हर कंपनी या हर निवेशक की स्थिति नहीं बताता। जब खबर आती है कि सेंसेक्स चढ़ गया, तो यह समझना चाहिए कि सूचकांक में शामिल कंपनियों के शेयरों के प्रदर्शन के आधार पर उसका स्तर बढ़ा है। और जब खबर आती है कि निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये डूब गए, तो यह देखना जरूरी है कि बात बाजार पूंजीकरण में गिरावट की हो रही है या वास्तविक लेनदेन से हुए नुकसान की। शेयर बाजार में कीमतें बदलती रहती हैं। इसलिए निवेशक के लिए जरूरी है कि वह केवल अंकों और सुर्खियों पर ध्यान न दे, बल्कि उनके पीछे का अर्थ भी समझे।

क्योंकि सेंसेक्स बाजार की दिशा का संकेत देता है, लेकिन निवेश का सही फैसला करने के लिए उससे आगे की जानकारी भी जरूरी है।

रियल टाइम्स एक्सप्लेनर

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