SIR के बाद अब SSR, ये क्या है? मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की नई प्रक्रिया, क्यों करनी पड़ी ये शुरुआत

17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण,
देश की चुनाव प्रणाली की सबसे विवादित प्रक्रियाओं में शामिल विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद अब मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी SSR पर ध्यान गया है। SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हुए , अब तक सामने आई जानकारी के मुताबिक देश में 13.3 करोड़ लोगों के नाम एसआईआर के बाद मतदाता सूची से हटे हैं। । इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप हुए, विरोध प्रदर्शन हुए और मामला न्यायिक बहस का विषय बना है। इसी बीच भारत निर्वाचन आयोग ने बेहद खामोशी से 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का निर्देश दिया है। छत्तीसगढ़ भी इनमें शामिल है। राज्य में SIR के दौरान 19 लाख 13 हजार 540 मतदाता Absent/Shifted श्रेणी में दर्ज किए गए थे। अब सवाल है कि SSR क्या है? क्या इससे SIR में छूटे सभी लोगों के नाम अपने आप वापस जुड़ जाएंगे? क्या मतदाता को कोई फॉर्म भरना होगा? और अगर मतदाता का नाम सूची में नहीं है, तो उसे क्या करना चाहिए? आइए समझते हैं, REAL TIMES EXPLAINER के साथ।
SSR क्या है?
SSR का पूरा नाम Special Summary Revision है। हिंदी में इसे मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कहा जाता है।
यह मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया है। इसके माध्यम से नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जा सकते हैं, मौजूदा प्रविष्टियों में सुधार किया जा सकता है और नियमों के अनुसार अपात्र या गलत प्रविष्टियों पर कार्रवाई की जा सकती है।
मतदाता सूची एक स्थिर दस्तावेज नहीं है। हर साल नए युवा मतदान की उम्र तक पहुँचते हैं, लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं, कुछ मतदाताओं की मृत्यु हो जाती है और कई लोगों के नाम या पते में सुधार की जरूरत पड़ती है। SSR का उद्देश्य इन बदलावों को सूची में दर्ज करना है।
इस बार SSR का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि इसके पहले कई राज्यों में SIR की प्रक्रिया हुई और मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम बाहर होने को लेकर विवाद उठा।
SIR और SSR में क्या अंतर है?
दोनों का संबंध मतदाता सूची से है, लेकिन दोनों का तरीका और दायरा एक जैसा नहीं है।
SIR यानी Special Intensive Revision विशेष गहन पुनरीक्षण है। इसमें मतदाता सूची का अधिक व्यापक सत्यापन किया जाता है। इसके दौरान घर-घर जाकर जानकारी जुटाने, मतदाता की स्थिति जाँचने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सूची को संशोधित करने जैसे काम किए जाते हैं।
SSR यानी Special Summary Revision विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण है। इसमें मौजूदा मतदाता सूची को अद्यतन करने, नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने और त्रुटियों को सुधारने पर जोर रहता है।
सरल भाषा में समझें तो SIR व्यापक स्तर पर मतदाता सूची के सत्यापन की प्रक्रिया है, जबकि SSR सूची को अद्यतन रखने की नियमित प्रक्रिया है।
दोनों प्रक्रियाओं में नाम जोड़ने, सुधार करने या किसी प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज करने के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना होता है।
SIR में छूटे लोगों के लिए SSR क्यों महत्वपूर्ण है?
SIR के दौरान यदि किसी मतदाता का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं आया, तो उसके पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, सत्यापन के समय व्यक्ति अपने पते पर नहीं मिला, वह कहीं और चला गया, उसका गणना प्रपत्र जमा नहीं हुआ या रिकॉर्ड का मिलान नहीं हो पाया।
छत्तीसगढ़ के SIR के आधिकारिक आँकड़ों में 19,13,540 मतदाता Absent/Shifted श्रेणी में दर्ज हुए। इस श्रेणी का अर्थ यह नहीं है कि सभी लोग स्थायी रूप से मतदान के अधिकार से वंचित हो गए हैं। इसका अर्थ है कि सत्यापन के दौरान उन्हें अनुपस्थित या स्थानांतरित श्रेणी में दर्ज किया गया।
यही अंतर समझना जरूरी है। किसी व्यक्ति का नाम सूची में नहीं दिख रहा है, तो उसे अपनी वर्तमान स्थिति की जाँच करनी चाहिए। पात्र होने पर निर्धारित आवेदन और सत्यापन प्रक्रिया के माध्यम से नाम शामिल कराने का रास्ता उपलब्ध हो सकता है।
लेकिन SSR में नाम अपने आप वापस जुड़ने की गारंटी नहीं है। हर आवेदन पर संबंधित नियमों के अनुसार कार्रवाई होगी।
छत्तीसगढ़ में 19.13 लाख का आँकड़ा क्या बताता है?
छत्तीसगढ़ के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय की ओर से जारी SIR संबंधी आँकड़ों के अनुसार, राज्य में 19 लाख 13 हजार 540 मतदाता Absent/Shifted श्रेणी में दर्ज हुए थे।
इसका मतलब है कि सत्यापन के दौरान इन मतदाताओं के बारे में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जानकारी नहीं मिल सकी या वे अपने दर्ज पते पर उपलब्ध नहीं पाए गए। ऐसे मामलों में कारण अलग-अलग हो सकते हैं।
किसी मतदाता का वास्तव में स्थानांतरण हो चुका हो, वह अस्थायी रूप से बाहर हो, गणना प्रपत्र समय पर जमा न हुआ हो या सत्यापन में कोई समस्या आई हो—इन स्थितियों को एक जैसा नहीं माना जा सकता।
इसीलिए इस आँकड़े को उन सभी लोगों की संख्या नहीं मानना चाहिए जो निश्चित रूप से SSR के माध्यम से दोबारा सूची में शामिल हो जाएंगे। वास्तविक स्थिति व्यक्ति के रिकॉर्ड और आवेदन के सत्यापन से स्पष्ट होगी।
SSR में किसे क्या करना चाहिए?
यदि आप पात्र मतदाता हैं, तो सबसे पहले अपनी वर्तमान मतदाता सूची में नाम की स्थिति जाँचें।
यदि नाम सूची में मौजूद है: अपना नाम, पता और अन्य विवरण ध्यान से देखें। किसी गलती की स्थिति में सुधार के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाएँ।
यदि नाम सूची में नहीं है: यह मानकर न चलें कि नाम स्थायी रूप से हट गया है या अपने आप वापस आ जाएगा। संबंधित निर्वाचन कार्यालय से स्थिति की जानकारी लें और नाम शामिल कराने की निर्धारित प्रक्रिया अपनाएँ।
यदि आप नए मतदाता हैं: पात्रता पूरी होने पर नए मतदाता के पंजीकरण के लिए निर्धारित आवेदन करें।
यदि आप दूसरे स्थान पर चले गए हैं: अपने वर्तमान पते और पुराने मतदाता रिकॉर्ड की स्थिति के अनुसार उचित आवेदन करें। एक से अधिक स्थानों पर नाम दर्ज रखने के बजाय सही प्रविष्टि सुनिश्चित करें।
यदि आवेदन पर आपत्ति या अस्वीकृति आती है: उसका कारण समझें, जरूरी जानकारी जुटाएँ और लागू नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करें।
नाम जुड़वाने के लिए कौन-सा फॉर्म काम आता है?
मतदाता सेवाओं में अलग-अलग जरूरतों के लिए अलग फॉर्म निर्धारित हैं।
- Form 6: नए पात्र मतदाता के पंजीकरण के लिए।
- Form 7: मतदाता सूची में नाम शामिल करने पर आपत्ति या नाम हटाने से संबंधित निर्धारित मामलों के लिए।
- Form 8: मतदाता के विवरण में सुधार, पते के स्थानांतरण और निर्धारित अन्य संशोधनों के लिए।
किसी विशेष SIR या SSR चरण में आयोग के निर्देशों के अनुसार अतिरिक्त प्रक्रिया या अलग निर्देश लागू हो सकते हैं। इसलिए केवल फॉर्म के नाम के आधार पर आवेदन न करें; अपनी स्थिति के लिए लागू निर्देश जरूर देखें।
SSR कब और कहाँ हो रहा है?
भारत निर्वाचन आयोग ने 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SSR का निर्देश दिया है। इनमें छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, बिहार, गुजरात, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्य व केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं। इस SSR के लिए 1 जनवरी 2027 को अर्हता तारीख निर्धारित की गई है। इसका अर्थ है कि उस तारीख तक लागू पात्रता शर्तें पूरी करने वाले व्यक्ति निर्धारित नियमों के अनुसार मतदाता के रूप में पंजीकरण के पात्र हो सकते हैं।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रक्रिया नवंबर से शुरू हो रही है और ड्राफ्ट मतदाता सूची 12 नवंबर 2026 को प्रकाशित किए जाने का कार्यक्रम बताया गया है। दावे और आपत्तियों की अवधि तथा अंतिम सूची की तारीख के लिए संबंधित राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की अधिसूचना देखना जरूरी है।
यह भी ध्यान रहे कि जिन राज्यों में SIR चल रहा है या हाल में पूरा हुआ है, वहाँ का कार्यक्रम अलग से घोषित किया जा सकता है।
क्या SSR से SIR का विवाद समाप्त हो जाएगा?
यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। SSR मतदाता सूची को अद्यतन करने का एक अलग अवसर है, लेकिन इससे SIR के दौरान उठे सभी सवाल अपने आप समाप्त नहीं हो जाते।
यदि किसी पात्र मतदाता का नाम छूटा है, तो उसके लिए आवेदन, जाँच और नियमों के अनुसार निर्णय जरूरी होगा। इसी तरह, मतदाता सूची में पारदर्शिता, नाम हटाने के कारणों की स्पष्ट जानकारी और नागरिकों को समय पर सूचना मिलना भी महत्वपूर्ण है।
मतदाता का अधिकार केवल सूची में नाम दर्ज होने तक सीमित नहीं है। उसे अपनी स्थिति जानने, गलती सुधारने और निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से अपना दावा रखने का अवसर मिलना चाहिए।



