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209 करोड़ की साइबर ठगी का भंडाफोड़, MBBS डॉक्टर समेत 9 गिरफ्तार; विदेशी लिंक भी सामने आए

जम्मू-कश्मीर पुलिस (Jammu and Kashmir Police) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन निवेश घोटाले (international online investment scams) का खुलासा करते हुए 209 करोड़ रुपये की ठगी का पर्दाफाश किया है। मामले में एक एमबीबीएस डॉक्टर (MBBS Doctor ) सहित कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में इस नेटवर्क के तार विदेशों तक जुड़े पाए गए हैं।

शिकायत से खुला पूरा नेटवर्क
यह मामला Ganderbal जिले के सफापोरा निवासी की शिकायत पर दर्ज एफआईआर से सामने आया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया, जिसमें साइबर विशेषज्ञों को शामिल किया गया। शुरुआती जांच में ही यह साफ हो गया कि यह कोई स्थानीय नहीं, बल्कि संगठित ट्रांसनेशनल फ्रॉड रैकेट है।

सोशल मीडिया और फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से जाल
जांच में पता चला कि आरोपियों ने सोशल मीडिया पर नकली निवेश वेबसाइट्स और कॉइन-ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म बनाए। लोगों को “कम समय में ज्यादा मुनाफा” का लालच देकर निवेश कराया जाता था।
निवेशकों से रकम अलग-अलग स्थानीय बैंक खातों में डलवाई जाती थी, जिनका संचालन मुख्य रूप से Srinagar, Budgam और Baramulla जैसे इलाकों से किया जा रहा था।

 

गरीबों के खातों का किया गया इस्तेमाल

गिरोह बीपीएल वर्ग के लोगों को 8 से 10 हजार रुपये प्रतिमाह का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड इस्तेमाल करता था।
फर्जी क्यूआर कोड बनाकर वेबसाइट्स पर अपलोड किए जाते और टेलीग्राम चैनलों के जरिए लगातार नए भुगतान माध्यम जोड़े जाते।
जैसे ही किसी खाते पर ज्यादा लेनदेन या शिकायत आती, उसे बंद कर नया अकाउंट सक्रिय कर दिया जाता।

835 बैंक खातों की जांच, रकम और बढ़ने की आशंका

पुलिस ने अब तक 835 बैंक खातों की जानकारी जुटाई है और 290 खातों के लेनदेन का सत्यापन किया है।
इन खातों के जरिए 209 करोड़ रुपये की ठगी की पुष्टि हुई है, जबकि जांच एजेंसियों को आशंका है कि कुल रकम 400 करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकती है।

मुख्य आरोपी: डॉक्टर, जिसने विदेश में सीखी ठगी की तकनीक

मामले का मुख्य आरोपी Ekant Yogdutt है, जो हरियाणा के Hisar का निवासी बताया गया है।
पुलिस के अनुसार उसने Philippines में एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान साइबर फ्रॉड के तरीकों की जानकारी हासिल की और बाद में China के नागरिकों से संपर्क स्थापित कर नेटवर्क तैयार किया।
उसे भारत लौटने पर Delhi एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया।

कई स्तरों पर घुमाया जाता था पैसा

ठगी की रकम को कई लेयर में ट्रांसफर कर राज्य से बाहर और फिर अंतरराष्ट्रीय खातों में भेजा जाता था, ताकि मनी ट्रेल छिपी रहे।
जांच में कुछ बैंक कर्मियों की संदिग्ध भूमिका भी सामने आई है, जिन्होंने खातों और क्यूआर कोड संचालन में मदद की।

पुलिस की अपील: लालच वाले निवेश से बचें

पुलिस ने लोगों को चेतावनी दी है कि

अत्यधिक रिटर्न का दावा करने वाले ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म से दूर रहें

किसी को भी अपना बैंक अकाउंट या एटीएम उपयोग के लिए न दें

साइबर ठगी की शिकायत तुरंत राष्ट्रीय साइबर पोर्टल या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दर्ज कराएं

जांच एजेंसियां अब मनी ट्रेल को पूरी तरह ट्रेस कर आरोपियों की संपत्तियां जब्त करने की प्रक्रिया में जुटी हैं। यह मामला देश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराध के नए और खतरनाक स्वरूप की ओर इशारा करता है।

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