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दिल्ली में कोरोना ‘आउट ऑफ कंट्रोल’ स्टेडियम बनेंगे अस्थाई अस्पताल

नई दिल्ली, (Realtimes) देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस कंट्रोल से बाहर हो चुका है. कोरोना वायरस के लगातार हो रहे रौद्र रूप को देखते हुए प्रगति मैदान, तालकटोरा स्टेडियम, जवाहर लाल नेहरु स्टेडियम और ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम, त्यागराज स्टेडियम, इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम, को मेकशिफ्ट अस्पताल के रुप में इस्तेमाल किए जाने की तैयारी है ।

उपराज्यपाल अनिल बैजल की अध्यक्षता में मंगलवार को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक में दिल्ली में कोरोना संक्रमण को लेकर उच्च स्तरीय बैठक हुई। बैजल ने बैठक में सलाह दी कि मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरू आदि से सीख लेकर कोरोना प्रबंधन के लिए दिल्ली में वायरस से निपटने को बेहतर इंतजाम किए जाने की जरूरत है।

डिवीजनल आयुक्त की अगुवाई में एक समिति गठित की गई है जो जरुरत पड़ने पर अतिरिक्त बेड्स की संभावनाओं का पता लगायेगी। बैठक में सुझाव दिया गया कि जरूरत पड़ने पर प्रगति मैदान, तालकटोरा स्टेडियम, त्यागराज स्टेडियम, इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम, जवाहर लाल नेहरु स्टेडियम और ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम आदि को मेकशिफ्ट अस्पताल के रुप में इस्तेमाल किया जाये।

बैठक के बाद उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली में 31 जुलाई तक साढ़े पांच लाख कोरोना केस हो सकते हैं और 80 हजार बेड्स की जरूरत पड़ेगी।

दिल्ली कोरोना के मामले में देश में तीसरे स्थान पर है और जून में रोजाना एक हजार अथवा उससे कहीं अधिक संक्रमण के मामले आ रहे हैं।

दिल्ली में कोरोना के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने फैसला लिया था कि सरकार के अस्पतालों केवल दिल्ली वालों का इलाज होगा लेकिन उनका ये फैसला बैजल ने निरस्त कर दिया।

दिल्ली सरकार के पैनल ने कुछ सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रगति मैदान, तालकटोरा स्टेडियम, इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम, जेएलएन स्टेडियम को कोरोना वायरस से बचाव के लिए उपयोग कर सकते हैं।

फिलहाल दिल्ली में 12.6 दिन में कोरोना केस डबल हो रहे हैं।

सिसोदिया ने कहा कि केंद्र सरकार मानती है फिलहाल दिल्ली में वायरस का सामुदायिक फैलाव नहीं हो रहा है, जबकि दिल्ली सरकार को लगता है कि यह शुरू हो चुका है।

बैजल ने कोविड-19 के मद्देनजर सभी संबंधित अधिकारियों को चिकित्सा क्षमता को लगातार बढ़ाने के लिए मानव संसाधनों एवं आधारभूत संरचना पर यथार्थवादी संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए।

उपराज्यपाल ने आइसीएमआर की गाइडलाइंस के अनुसार सभी हितधारकों को कनटेनमेंट जोन में रणनीति बनाने के निर्देश दिए। साथ ही सभी क्षेत्र अधिकारियों को कनटेनमेंट जोन में रोग के प्रसार को रोकने के लिए प्रभावी प्रबंधन को सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

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