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राहुल गांधी पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी की उस टिप्पणी पर आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि चीन ने 2000 वर्ग किलोमीटर जमीन कब्जा लिया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि किस विश्वसनीय दस्तावेज के आधार पर आपने ये बात कही, जबकि एक सच्चा भारतीय ऐसा नहीं कहेगा। जब सीमा पार कोई विवाद हो, तो आप ये सब कैसे कह सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि एक सच्चे भारतीय होने के नाते राहुल गांधी को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए। 

उच्चतम न्यायालय ने राहुल गांधी के खिलाफ निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर रोक लगाई। अदालत ने यूपी सरकार और शिकायतकर्ता उदय शंकर श्रीवास्तव को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते में जवाब मांगा है। सीमा सड़क संगठन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना का मामला दर्ज कराया था। राहुल गांधी ने निचली अदालत की ओर से जारी समन को रद्द करने की मांग की है। राहुल गांधी पर आरोप है कि उन्होंने 9 दिसंबर, 2022 को भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच हुई झड़प को लेकर सेना के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि राहुल गांधी ने बार-बार कहा कि चीनी सेना अरुणाचल प्रदेश में हमारे सैनिकों की ‘पिटाई’ कर रही है और भारतीय प्रेस इस संबंध में कोई सवाल नहीं पूछेगा। भारतीय सेना और चीनी कब्जे वाले बयान पर राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से फटकार लगने के बाद कांग्रेस ने सफाई दी है। 

कांग्रेस ने कहा कि 2020 की गलवां घटना के बाद से हर देशभक्त भारतीय सरकार से चीन पर जवाब मांग रहा है। लेकिन मोदी सरकार ने अपनी डीडीएलजे – इनकार, ध्यान भटकाना, झूठ बोलना और उचित ठहराना नीति के साथ सच्चाई को धुंधलाने और छिपाने का विकल्प चुना है।कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार 1962 के बाद से भारत को मिले सबसे बड़े क्षेत्रीय झटके के लिए जिम्मेदार है। कांग्रेस ने सरकार पर अपनी कायरता और गलत आर्थिक प्राथमिकताओं के कारण शत्रुतापूर्ण चीन के साथ सामान्यीकरण करने का आरोप लगाया।कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि 15 जून 2020 को गलवा में 20 बहादुर सैनिकों के शहीद होने के बाद से हर देशभक्त भारतीय जवाब मांग रहा है। 

फिर भी जवाब देने के बजाय मोदी सरकार ने पिछले पांच वर्षों में डीडीएलजे – इनकार, ध्यान भटकाना, झूठ बोलना और उचित ठहराना की नीति के साथ सच्चाई को धुंधला और छिपाने का विकल्प चुना है। एक्स पर एक पोस्ट में जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 19 जून 2020 को हमारे सैनिकों द्वारा गलवां में देश के लिए वीरतापूर्वक अपने प्राणों की आहुति देने के केवल चार दिन बाद ‘न कोई हमारी सीमा में घुस आया है, न ही कोई घुसा हुआ है’ कहकर चीन को क्लीन चिट क्यों दे दी उन्होंने कहा कि सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि ‘हम अप्रैल 2020 की यथास्थिति पर वापस जाना चाहते हैं।’ क्या 21 अक्टूबर 2024 का वापसी समझौता हमें यथास्थिति पर वापस ले जाता है?। 

जयराम रमेश ने कहा कि क्या भारतीय गश्ती दल को देपसांग, डेमचोक में गश्ती बिंदुओं तक पहुंचने के लिए चीन की सहमति लेने की आवश्यकता नहीं है। जबकि पहले वे भारत के क्षेत्रीय अधिकारों का स्वतंत्र रूप से प्रयोग करने में सक्षम थे। उन्होंने पूछा कि क्या भारतीय गश्ती दल को गलवां, हॉट स्प्रिंग और पैंगोंगत्सो में अपने गश्ती बिंदुओं तक पहुंचने से बफर जोन द्वारा नहीं रोका जा रहा है, जो मुख्य रूप से भारतीय दावा रेखा के भीतर हैं।

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