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हंगामें की भेंट चढ़ी संसद की कार्यवाही

  • रिजिजू बोले- विपक्ष अपना रहा दोहरे मानदंड
  • राज्य सभा में विपक्ष के हंगामे के बीच दी गयी धनखड़ के इस्तीफे की सूचना
  • धनखड़ ने सोमवार की रात्रि राष्ट्रपति को भेजा था अपना त्यागपत्र

नई दिल्ली। मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को भी संसद नहीं चल पाई। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही दो बार के स्थगन के बाद दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष से सदन को चलने देने का अनुरोध करते हुए कहा कि सरकार उनकी मांगों के अनुरूप चर्चा को तैयार है। फिर भी विपक्ष दोहरे मानदंड अपना रहा है। 

संसदीय कार्य मंत्री रिजिजू ने लोकसभा में दो बार के स्थगन के बाद विपक्ष से अनुरोध किया कि वे सदन को चलने दें। उन्होंने बताया कि कार्य मंत्रणा समिति में चर्चा हुई थी जिसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है। विपक्ष सरकार से ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा चाहता है जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है लेकिन विपक्ष के सभी मुद्दों पर एक साथ चर्चा संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि कार्य मंत्रणा समिति में ऑपरेशन सिंदूर पर किस नियम के तहत कितनी देर चर्चा होनी है तय किया गया है। एक साथ सभी मुद्दों पर चर्चा संभव नहीं है। विपक्ष चर्चा की मांग कर रहा है और सरकार इसे स्वीकार कर रही है ऐसे में विपक्ष का दोहरा मानदंड नहीं चलेगा। देश के करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। इसके बाद पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने विपक्ष से सरकार के अनुरोध पर विचार करने का आग्रह किया। 

उन्होंने कहा कि सदन में प्लेकार्ड और पोस्टर लाना गणतंत्र के लिए ठीक नहीं है। शोर-शराबा रुकते न देख उन्होंने कार्यवाही को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया। राज्यसभा में भी यही स्थिति रही और उपसभापति हरिवंश को कार्यवाही को दिनभर के लिए स्थगित करना पड़ी। लोकसभा में सुबह कार्यवाही की शुरूआत में अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष को हंगामे के दौरान नारेबाजी नहीं करने और तख्तियां लेकर नहीं आने के लिए कहा। उनके बार-बार कहने पर भी हंगामा जारी रहा, जिसके चलते कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी गयी। दोपहर 12 बजे भी कार्यवाही नहीं चली और दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी। दूसरी ओर राज्यसभा में आज उपसभापति हरिवंश ने कार्यवाही प्रारंभ की। उन्होंने शून्यकाल को चलने देने का अनुरोध किया। विपक्ष के हंगामे के चलते कार्यवाही को 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। 
 
राज्य सभा को उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे की मंगलवार को औपचारिक सूचना दी गयी।पीठासीन उप सभापति घनश्याम तिवाड़ी ने पूर्वाह्न में स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे सदन में प्रश्न-काल की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे और शोर शराबे के बीच उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 22 जुलाई 2025 को जारी अधिसूचना की जानकारी दी। उन्होंने अधिसूचना का हवाला देते हुए संविधान के अनुच्छेद 67 (ए) के अंतर्गत उपराष्ट्रपति धनखड़ के इस्तीफे की सूचना दी। इस अनुच्छेद के अनुसार उप-राष्ट्रपति राष्ट्रपति को संबोधित अपने हाथ से लिखे पत्र के द्वारा अपने पद से इस्तीफा दे सकता है । यह इस्तीफा तुरंत स्वीकार माना जाएगा। उपराष्ट्रपति पदेन राज्य सभा के सभापति भी होते हैं। सोमवार रात राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को अपना त्यागपत्र भेजा था। उन्होंने अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए देश में दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद को छोड़ने का फैसला किया है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित विपक्षी सांसदों ने मंगलवार को बिहार में जारी मतदाता सूची अपडेट प्रक्रिया एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के मुद्दे पर संसद के मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में कई विपक्षी दलों के नेताओं ने भाग लिया। इममें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आरजेडी, द्रमुक और अन्य विपक्षी पार्टियों के नेता थे। सभी ने अपने हाथ में एसआईआर के विरोध में पोस्टर कार्ड पकड़े हुए थे। इनमें लिखा था कि एसआईआर भारतीयों के अधिकार छीन रहा है। साथ ही इसे रोके जाने के नारे लगाए जा रहे थे। उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले एसआईआर करा रहा है। इसका मकसद मतदाता सूची को अपडेट करना है। इसमें 90.67 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने फार्म भरे हैं। इससे आगे ड्राफ्ट मतदाता सूची और 30 सितंबर तक अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाएगी।

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