प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों को दिया आत्मविश्वास का मंत्र - realtimes
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 प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों को दिया आत्मविश्वास का मंत्र

  • लक्ष्य को प्राप्त करने से आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा
  • पीएम ने ज्ञान और परीक्षा को दो अलग चीज बताया

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली की प्रतिष्ठित सुंदर नर्सरी में परीक्षा पे चर्चा (पीपीसी) के 8 वें संस्करण के दौरान देशभर के विद्यार्थियों से बातचीत की। उन्होंने व्यक्तित्व में सुधार और खामियों को दूर करने में चुनौती को अहम बताया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी खुद को चुनौती दें और एक लक्ष्य निर्धारित करें। लक्ष्य को प्राप्त करने से आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि परीक्षाएं ही सब कुछ नहीं हैं। उन्होंने ज्ञान और परीक्षा को दो अलग चीज बताया।

उन्होंने कहा कि किसी को भी परीक्षा को अंतिम लक्ष्य नहीं समझना चाहिए। प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों के साथ अनौपचारिक बातचीत में कई विषयों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को हर समय अच्छी तरह से तैयार रहना चाहिए और स्वयं को चुनौती देते रहना चाहिए। उदाहरण के लिए यदि आप पिछली बार किसी परीक्षा में 30 अंक लाए थे तो अगली बार 35 अंक लाने हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग खुद से खुद की लड़ाई लड़ते ही नहीं हैं। प्रधानमंत्री ने इसके लिए मन को स्थिर कर स्वयं की क्षमताओं और लक्ष्य को पहचाने की सलाह दी। उन्होंने लोगों से बार-बार खुद से पूछने का आग्रह किया कि वे क्या बन सकते हैं, क्या हासिल कर सकते हैं और कौन से काम उन्हें संतुष्टि देंगे।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी का ध्यान अखबार या टीवी जैसे दैनिक बाहरी प्रभावों से प्रभावित नहीं होना चाहिए, बल्कि समय के साथ लगातार विकसित होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने बताया कि बहुत से लोग अक्सर अपने दिमाग को बिना दिशा के भटकने देते हैं। प्रधानमंत्री ने उन्हें सलाह दी कि वे अपने निर्णयों में लापरवाही न बरतें और किसी ऐसी चीज पर शांति पाने के लिए अपना मन बनाएं जो उन्हें चुनौतियों से निपटने में मदद करेगी। मोदी ने कहा कि ज्यादातर लोग खुद से नहीं बल्कि दूसरों से प्रतिस्पर्धा करते हैं, अक्सर अपनी तुलना उन लोगों से करते हैं जो शायद कम सक्षम हों।

उन्होंने कहा कि खुद से प्रतिस्पर्धा करने से अटूट आत्मविश्वास पैदा होता है, जबकि दूसरों से खुद की तुलना करने से निराशा होती है। असफलता से उबरने के सवाल पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगर 30-40 प्रतिशत छात्र 10वीं या 12वीं कक्षा में फेल भी हो जाएं, तो भी जीवन खत्म नहीं हो जाता। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जीवन में सफल होना है या सिर्फ पढ़ाई में। उन्होंने असफलताओं को अपना शिक्षक बनाने की सलाह दी। क्रिकेट का उदाहरण देते हुए कहा कि खिलाड़ी अपनी गलतियों की समीक्षा करते हैं और सुधार के लिए प्रयास करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे समाज में दुर्भाग्य से ये घुस गया कि अगर हम स्कूल में इतने नंबर नहीं लाए, दसवीं-बारहवीं में इतने नंबर नहीं आए तो जिंदगी तबाह हो जाएगी। इसलिए पूरे घर में तनाव हो जाता है, ऐसे में आपको खुद को तैयार करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे में इस तनाव को मन में न लें और तय करें कि आपको आज कितना पढ़ना है। ये अगर आप कर लेते हैं, तो आप इस तनाव से खुद को निकाल सकते हैं।

परीक्षा के दौरान अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के विषय पर प्रधानमंत्री ने कहा कि प्राथमिक मुद्दा छात्रों के साथ कम और उनके परिवारों के साथ अधिक है। उन्होंने कहा कि कई माता-पिता अपने बच्चों पर इंजीनियरिंग या चिकित्सा जैसे विशिष्ट करियर को आगे बढ़ाने के लिए दबाव डालते हैं, जबकि बच्चे की रुचि कला जैसे क्षेत्रों में होती है। यह निरंतर दबाव बच्चे के जीवन को तनावपूर्ण बना देता है। उन्होंने माता-पिता से अपने बच्चों की क्षमताओं और रुचियों को समझने और पहचानने, उनकी प्रगति की निगरानी करने और सहायता प्रदान करने का आग्रह किया।

उन्होंने छात्रों की तुलना न करने और प्रत्येक बच्चे की अनूठी क्षमताओं को प्रोत्साहित करने के महत्व पर जोर दिया। पीएम ने कहा कि नेता बनने के लिए टीमवर्क के साथ-साथ समझदारी और धैर्य भी जरूरी है। आपको अपने साथियों के लिए मौजूद रहना होगा और इससे विश्वास पैदा होगा। यह विश्वास ही आपके नेतृत्व को सुनिश्चित करेगा।

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