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कोरोना वैक्सीन का पहली बार इंसानी टेस्ट, सफलता की उम्मीद बढ़ी

नईदिल्ली (Realtimes) कोरोना वायरस को लेकर ब्रिटेन में वैज्ञानिकों ने एक नया ह्यूमन ट्रायल शुरू कर दिया है. शुक्रवार को यहां कोरोना वायरस के टीके लगाने की शुरुआत कर दी गई है. इस ट्रायल में एक माइक्रो बॉयोलॉजिस्ट को कोविड-19 का पहला टीका लगाया गया. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए इस ट्रायल में 800 में से एलिसा ग्रैनेटो को चुना गया.

वैज्ञानिकों का दावा है कि यह टीका प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर कोरोना वायरस से लड़ने में शरीर की मदद करेगा ऑक्सफोर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट एलिसा को लगाए गए टीके पर वैज्ञानिकों की उम्मीदें टिकी हैं.

खुद पर हुए ह्यूमन ट्रायल के बाद एलिसा ने बताया, ‘एक वैज्ञानिक होने के नाते मैं इस रिसर्च को सपोर्ट करना चाहती हूं. इस वायरस पर अब तक कोई स्टडी न करने का मुझे अफसोस था, लेकिन अब मुझे लग रहा है यह सहयोग करने का सबसे आसान तरीका है.’

बता दें कि जिस दिन एलिसा पर यह ट्रायल शुरू हुआ उस दिन संयोग से उनका 32वां जन्मदिन भी था. एलिसा ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि यह ट्रायल हमें वैक्सीन के नतीजे तक जरूर लेकर जाएगा.

कोविड-19 की तरह मेनिनजाइटिस भी एक संक्रामक रोग है, जिसमें दिमाग और रीढ़ की हड्डी की झिल्ली में सूजन बढ़ जाती है.  एलिसा के अलावा कैंसर पर रिसर्च करने वाले एडवर्ड ओनील को भी यह टीका लगाया गया है. ओनील को मेनिनजाइटिस नाम की बीमारी का टीका लगाया गया है.

एलिसा और ओनील को टीके लगने के बाद अब 48 घंटे तक उनकी सेहत पर नजर रखी जाएगी. वैक्सीन के प्रभाव को समझने के बाद वैज्ञानिक दूसरे चरण में अन्य वॉलंटियरों को टीका लगाएंगे.

दूसरे चरण के लिए 18 से 55 साल तक के स्वस्थ लोगों को चुना गया है. इन सभी लोगों को दो गुटों में बांटने के बाद उन पर दोनों अलग-अलग वैक्सीन का ट्रायल किया जाएगा. हालांकि, उन्हें यह नहीं बताया जाएगा कि उन्हें कौन सा टीका दिया गया है.

बता दें कि इससे पहले माना जा रहा था कि रेमडेसिवीर कोविड-19 की इलाज में कारगर साबित हो सकती है, लेकिन चीन के परीक्षण में यह दवा सफल नहीं हुई.

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