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राजनांदगांव: जिन नेताओं ने चुनाव की कमान संभाली, उनके गांव में भी हारी कांग्रेस

चुनाव अभियान में कांग्रेस पदाधिकारियों को जुड़ने नहीं दिया
भूपेश बघेल का दमदार चेहरा होने के बाद भी मिली हार

कवर्धा। लोकसभा चुनाव में राजनांदगांव से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की हार ने लोगों को चौंकाया है क्योंकि भाजपा प्रत्याशी संतोष पांडे की निष्क्रियता एक बड़ा मुद्दा थीं। भाजपा ने एंटी इनकंबेंसी को देखते हुए मोदी के चहरे पर चुनाव लड़ा।चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी भूपेश बघेल के इर्द गिर्द घेराबंदी करने वाले कांग्रेस नेताओं के गृह ग्राम में भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।


कांग्रेस के महेश चंद्रवंशी के ग्राम लोहझरी,लालजी चंद्रवंशी के ग्राम बिटकुली, लालबहादुर चंद्रवंशी के ग्राम नेवारीगुड़ा, तुकाराम चंद्रवंशी के गड़ईखुर्द,अशोक चंद्रवंशी के ग्राम कानाभैरा में कांग्रेस पीछे रही।

इनके समूह के चलते चुनाव में हुआ ये कि बड़ी संख्या में कांग्रेसजन चुनावी सक्रियता से जुड़ नहीं पाए।पूरे चुनाव भर इन नेताओं का समूह किसी भी प्रभावशाली कांग्रेस नेता, पदाधिकारियों को चुनाव अभियान से जुड़ने नहीं दे रहा था। चुनाव में इसकी प्रतिक्रिया हुई।इसका दुष्परिणाम ये हुआ कि चुनाव में कांग्रेस पिछड़ते रही।पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जैसा दमदार चेहरा होने के बावजूद कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।अब हार की जिम्मेदारी उन नेताओं को लेनी चाहिए जिन्होंने चुनाव में कमान सम्हाली थी।

दूसरी बार सांसद बने संतोष पांडे

संतोष पांडे दूसरी बार लोकसभा सांसद निर्वाचित हुए हैं।उन्हें चुनाव मे 712057 वोट मिले जबकि कांग्रेस प्रत्याशी भूपेश बघेल 667646 बात हासिल कर पाए। इस तरह भूपेश बघेल को 44411 वोट से हार का सामना करना पड़ा।

राजनांदगांव में आठ विधानसभा क्षेत्र है।कबीरधाम जिले के पंडरिया से 3402 वोट की लीड लेने में कांग्रेस प्रत्याशी बघेल कामयाब रहे।कवर्धा में लोकसभा चुनाव में 10405 वोट से कांग्रेस पीछे रही ।

राजनांदगांव विस से भाजपा की लीड नहीं पाट पाई कांग्रेस

चुनाव में सबसे बड़ा गड्ढा राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र में रहा जहां से पूर्व मुख्यमंत्री तथा छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डा. रमन सिंह विधायक है। कोंग्रेस यहां 57 हजार से अधिक वोट से पीछे रह गई।विधानसभा चुनाव में डा. रमन 55 हजार वोट से चुनाव जीते थे।

लोकसभा चुनाव के कांग्रेस प्रत्याशी भूपेश बघेल ने कई विधानसभा क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन किया ।मोहला मानपुर में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के 41800 वोट की तुलना में 81141 वोट पाए। खुज्जी में भाजपा के 67475 वोट की तुलना में कांग्रेस को 82394 वोट मिले।

राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र में प्रदेश के पंद्रह वर्षों तक लगातार मुख्यमंत्री रहे डा. रमन का प्रभाव रहा हैं।यहां से 2014 में उनके पुत्र अभिषेक सिंह ने 235000 वोट से जीतकर प्रदेश में सर्वाधिक वोट से जीतने का कीर्तिमान बनाया था। 2019 में भी भाजपा प्रत्याशी संतोष ने कांग्रेस प्रत्याशी भोलाराम साहू को 112366 वोट से हराया था ।लगातार दो चुनाव में बड़े अंतर से कांग्रेस की हार के बावजूद भूपेश बघेल ने राजनांदगांव से लोकसभा चुनाव लड़ने हिम्मत दिखाई।

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