खास खबर: स्मार्ट मीटर अभी दूर की कौड़ी, अगले साल से ही लगने होंगे संभव

रायपुर. छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटरों का लगना अभी दूर की कौड़ी है। हालांकि रायपुर संभाग के साथ ही बिलासपुर और अंबिकापुर संभाग का टेंडर फाइनल हो गया है। इसी के साथ दुर्ग, बस्तर और पाॅवर कंपनी के राजनांदगांव संभाग को मिलाकर बनाए गए एक ग्रुप का 16 सौ करोड़ का री-टेंडर 9 जून को खुलेगा। लेकिन इसके फाइनल होने के बाद भी स्मार्ट मीटर इस साल किसी भी हाल में लगने प्रारंभ नहीं हो पाएंगे। मीटरों को लगाने से पहले कंट्रोल रूम बनाया जाना है। गुढ़ियारी में बनने वाले कंट्रोल रूम को लेकर अभी कुछ फाइनल नहीं हो सका है। यहां पर पॉवर कंपनी किसी पुरानी बिल्डिंग को ठीक करके टेंडर लेने वाली कंपनियों को देगी।
केंद्र सरकार ने सभी राज्यों में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना बनाई है। इसके लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को नियम बनाने का काम सौंपा गया है। प्राधिकरण ने तय किया है कि हर वर्ग के उपभोक्ताओं के मीटर बदले जाएंगे और सारे मीटर पोस्टपेड से बदलकर प्रीपेड हो जाएंगे। ऐसे में राज्य के 20 लाख बीपीएल वर्ग के उपभोक्ताओं के भी मीटर बदले जाएंगे, जबकि इसकी खपत सौ यूनिट से ज्यादा नहीं होती है। प्रदेश सरकार ने इनके मीटर न बदलने का आग्रह केंद्र सरकार से किया था, लेकिन इसको नहीं माना गया।
टाटा को रायपुर का 16 सौ करोड़ का काम
पावर कंपनी ने चार हजार करोड़ का काम होने के कारण तीन हिस्सों में टेंडर किया था। रायपुर संभाग बड़ा होने के कारण उसे अलग संभाग रखा गया और इसका टेंडर 16 सौ करोड़ का किया गया। इसका काम टाटा को मिल गया है। इसके बाद दुर्ग संभाग के साथ बस्तर संभाग और पॉवर कंपनी के राजनांदगांव संभाग को मिलाया गया। इसका टेंडर भी 16 सौ करोड़ का किया गया था। इसमें रेट बीड एकमात्र अदानी की होने के कारण इसका टेंडर रद्द कर दिया गया। इसका री-टेंडर किया गया, लेकिन इस बार भी इसमें अदानी के अलावा किसी दूसरी कंपनी ने रुचि नहीं दिखाई है। तय तिथि 10 मई तक महज अदानी की ही निविदा होने के कारण पहले इसकी तिथि 25 मई की गई, लेकिन इसके बाद भी और कोई निविदा नहीं आने पर फिर से इसकी तिथि बढ़ा दी गई है।
कंट्रोल रूम बनने में लगेगा लंबा समय
मीटर लगाने से पहले कंट्रोल रूम बनाए जाने हैं। इसके लिए तय किया गया है कि यह कंट्रोल रूम रायपुर में ही बनेगा। भले तीन अलग-अलग कंपनियों को टेंडर मिलेगा, लेकिन सभी का कंट्रोल रूम रायपुर में होगा। इसके लिए पॉवर कंपनी से गुढ़ियारी में स्थान किया है। लेकिन अभी यह तय नहीं है कि यहां पर कोई नई बिल्डिंग बनेगी या फिर किसी पुरानी बिल्डिंग को ठीक करके दिया जाएगा। अगर पुरानी बिल्डिंग को भी वापस ठीक करने का काम होगा तब भी कम से कम छह माह से ज्यादा समय लग जाएगा। ऐसे में इस साल को मीटर लगने संभव नहीं होंगे।
सरकारी विभागों में पहले लगेंगे
रायपुर के साथ बिलासपुर और अंबिकापुर संभाग का टेंडर फाइनल होने के बाद अब सबसे पहले स्मार्ट मीटर सरकारी विभागों के साथ बड़े व्यापारिक संस्थानों और फिर छोटे व्यापारिक संस्थानों में लगेंगे। इसके बाद घरेलू उपभोक्ताओं का नंबर आएगा। योजना से एक तो एचटी वर्ग के उद्योगों और कृषि पंपों को अलग रखा गया है। एचटी वर्ग में स्मार्ट मीटर लगने से कनेक्शन को कट करना संभव नहीं होगा, इसलिए इन्हें अलग रखा गया है। योजना में सभी मीटर प्रीपेड ही होंगे।



