City

सीएए पर भूपेश सरकार का विरोध संविधान और संघीय ढांचे के विपरीत: सरोज पाण्डेय

रायपुर(realtimes) भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सांसद सरोज पाण्डेय ने नागरिकता संशोधन कानून को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए पत्र को झूठ के धरातल पर भ्रम फैलाने की एक और नाकाम कोशिश बताया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का सीएए को लेकर जो रुख है, वह संविधान और संघीय ढांचे की एकदम विपरीत है।

भाजपा राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री बघेल जबसे सत्ता में आए हैं, केंद्र से बिलावजह टकराव मोल लेकर संवैधानिक व संघीय ढांचे को चुनौती देने का अमर्यादित आचरण कर रहे हैं। प्रदेश सरकार को सीबीआई-एनआईए नहीं चाहिए, मोटर व्हीकल एक्ट और सीएए से दिक्कत है यानी केंद्र सरकार और संसद द्वारा अधिनियमित कानूनों को नहीं मानने का राजनीतिक हठ प्रदर्शित करने पर आमादा प्रदेश सरकार उन विषयों पर भी गैरजरूरी टीका-टिप्पणी कर रही है, जिन्हें नकारने का राज्य सरकारों को न तो अधिकार है और न ही राज्य सरकारें उसे अपने राज्यों में अमान्य कर सकती हैं। लेकिन प्रदेश सरकार शुरू से अपने फैसलों के जरिए केंद्र को चुनौती देने और टकराव मोल लेने का काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि असहमति व्यक्त करने की भी अपनी मर्यादा होती है, इस बात की सामान्य समझ भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल नहीं दिखा रहे हैं, यह कांग्रेस के वैचारिक भटकाव और नेतृत्व की दिशाहीनता का द्योतक है। सुश्री पाण्डेय तंज कसा कि हर मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नकल करने वाले मुख्यमंत्री बघेल छात्रों से चर्चा करने ‘पाठशाला’ लगाते हैं, ‘मन की बात’ के समानांतर ‘लोकवाणी’ सुनाते हैं। जब हर मामले में वे प्रधानमंत्री श्री मोदी की नकल करते हैं तो संविधान, संघ-राज्य के संबंध, अधिकार, विधायी मर्यादा, संसदीय शिष्टाचार और समझ के मामले में भी मुख्यमंत्री बघेल को प्रधानमंत्री से सीख लेनी चाहिए।

सरोज पाण्डेय ने कहा कि अपने पत्र में मुख्यमंत्री बघेल ने एक बार फिर तथ्यों के साथ छेड़छाड़ कर भ्रम फैलाने के कांग्रेसी राजनीतिक चरित्र को उजागर किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह कई अवसरों पर सीएए को लेकर यह स्पष्ट कर चुके हैं कि यह कानून पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों (हिन्दू, सिक्ख, जैन, बौध्द, पारसी व ईसाई) को, जो वर्षों से भारत में रह रहे हैं, नागरिकता देने के लिए लाया गया है। इसमें कहीं भी और किसी भी समुदाय की नागरिकता छीनने या उन्हें अपनी नागरिकता प्रमाणित करने की बाध्यता की बात नहीं है। लेकिन विपक्ष लगातार भ्रम फैलाने की राजनीति करके देश में हिंसा और उन्माद की जमीन तैयार करने में रुचि ले रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button