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सीएए वापस ले सरकार-भूपेश की पीएम को चिट्ठी

कैबिनेट की बैठक में विवादित कानून पर बात
बजट सत्र में सरकार लाएगी सीएए के खिलाफ प्रस्ताव

रायपुर(realtimes) छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रिपरिषद( कैबिनेट) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विवादित नागरिका संशोधन कानून वापस लेने की मांग की है। राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस संबंध में प्रधानमंत्री को एक पत्र भेजा है। गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में  सीएए को वापस लेने का प्रस्ताव पारित किया गया है। मंत्रिपरिषद में तय किया गया है कि इस संबध में राज्य विधानसभा में अशासकीय संकल्प लाया जा सकता है या विधेयक के माध्यम से मामला लाया जाए यह बाद में तय किया जाएगा। राज्य सरकार का मानना है कि केंद्र सरकार को सीएए वापस लेना होगा। इस विवादित कानून के खिलाफ देश में लोग सड़कों पर हैं इसलिए इसे वापस लेने का आग्रह किया जा रहा है।

गुरूवार को हुई राज्य मंत्री परिषद की बैठक से पहले संभावना जताई जा रही थी कि इस कैबिनेट में सीएए को लेकर बात हो सकती है। दरअसल देश के चार राज्य पहले ही अपनी विधानसभाओं में सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पारित करवा चुके हैं। छत्तीसगढ़ में भी इस प्रकार होने की संभावना जताई जा रही थी।

कैबिनेट पर इस पर भी हुई बात

प्रदेश में धान खरीदी के मुद्दे पर चर्चा, बताया गया कि अब तक 63 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है। किसानों के खाते में 11 हजार करोड़ रुपए धान बिक्री के जा चुके हैं। राज्य में सिंचाई विकास प्राधिकरण के गठन का फैसला किया गया है।  कैबिनेट की बैठक के बाद मुख्यमंत्री निवास में छत्तीसगढ़ खेल प्राधिकरण की पहली बैठक भी हुई। तय हुआ कि प्रदेश में 12 स्टेडियम को चयनित कर खेल अकादमी बनाई जाएगी।

ये हैं मंत्रिपरिषद के निर्णय

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज निवास कार्यालय में मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित हुई। बैठक में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 (सी.ए.ए.) में किए गए संशोधन को आम जनता में देखे जा रहे विरोध के दृष्टिगत, वापस लिए जाने का अनुरोध भारत सरकार से करने का निर्णय लिया गया।

छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी (संशोधन) अध्यादेश, 2020 के प्रारूप का  अनुमोदन किया गया। जिसके तहत ‘‘कोई भी सोसायटी, किसी भी सरकार के उपक्रम सहकारी सोसायटी या राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित किसी उपक्रम या निजी उपक्रम के साथ, किसी विशेष कारबार के लिए जिसमें औद्योगिक विनिधान, वित्तीय सहायता या विपणन और प्रबंधन विशेषज्ञता शामिल है, सहयोग कर सकेगी।

कोई भी सहकारी सोसाइटी साधारण सभा के उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत से, उसके साधारण सम्मिलन में पारित संकल्प द्वारा ऐसा सहयोग कर सकेगी। सहकारी सोयाइटी को ऐसा सहयोग करने के पूर्व प्रत्येक मामले में राज्य सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य है।

किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान का 2500/-प्रति क्विंटल की दर से भुगतान सुनिश्चित करने के लिए अनुशंसा करने हेतु मंत्रिमण्डलीय उप-समिति के गठन का आदेश जारी किया गया है। जिसका बैठक में अनुसमर्थन किया गया।

राज्य में वर्तमान में वास्तविक सिंचाई क्षमता 10.38 लाख हेक्टेयर है, जोकि कुल कृषि योग्य भूमि का 18 प्रतिशत है। राज्य में सिंचाई के त्वरित विकास हेतु छत्तीसगढ़ अधोसंरचना विकास निगम को छत्तीसगढ़ सिंचाई विकास निगम में परिवर्तित किए जाने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। छत्तीसगढ़ अद्योसंरचना विकास निगम में कार्यरत अमले को जहां प्रतिनियुक्ति पर है, उन्हें वहीं पर यथावत रखने का निर्णय लिया गया। छत्तीसगढ़ सिंचाई विकास निगम का गठन अधिसूचना के दिनांक से प्रभावशील होगी।

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