रायपुर. भरी गर्मी में एक बार फिर से कोयले की कमी के चलते मड़वा की 500 मेगावाट की एक यूनिट बंद हो गई है। इसकी वजह से अपना उत्पादन 22 से 23 सौ मेगावाट ही हो रहा है। जहां तक खपत का सवाल है तो इस समय खपत पीक आवर में 52 सौ मेगावाट तक जा रही है। ऐसे में बिजली की पूर्ति करने के लिए सेंट्रल सेक्टर से रोज तीन हजार मेगावाट बिजली लेनी पड़ रही है। आने वाले समय में खपत में और इजाफा होगा। वैसे उत्पादन कंपनी के एमडी संजीव कुमार कटियार का कहना है, एक दो दिनों में कोयला आने लगेगा तो यूनिट प्रारंभ हो जाएगी। बिजली की कमी न होने का दावा भी किया जा रहा है
प्रदेश में लगातार बिजली के उपभोक्ता बढ़ रहे हैं। इस समय जहां 61 लाख से ज्यादा घरेलू और अन्य उपभोक्ता हो गए हैं, वहीं छह लाख से ज्यादा कृषि पंप हो गए हैं। ऐसे में खपत का ग्राफ भी लगातार बढ़ रहा है। कुछ साल पहले तक गर्मी और दीपावली में खपत 45 सौ मेगावाट तक जाती थी, लेकिन अब खपत पिछले दो साल से पांच हजार मेगावाट के पार होने लगी है।
बाकी संयंत्रों में कोयले का भरपूर स्टॉक
गर्मी में बिजली की ज्यादा खपत होने के कारण कोयले का भी भरपूर स्टॉक रखा गया है। कोरबा वेस्ट के साथ श्यामा प्रसाद मुखर्जी संयंत्र में भी 24-24 दिनों का स्टॉक है। मड़वा में ही कोयले को लेकर कुछ परेशानी है। यहां तक रेल की सुविधा न होने के कारण कोयला आने में परेशानी हो रही है। इसी के साथ होली के कारण वाहन चालकों ने लंबे समय तक छुट्टी मार दी जिसके कारण कोयले की आपूर्ति प्रभावित हुई और कुछ दिनों पहले एक यूनिट को बंद कर दिया गया है।
भरपूर बिजली की व्यवस्था
छत्तीसगढ़ राज्य पाॅवर उत्पादन कंपनी के अपने पाॅवर प्लांटों की क्षमता 2960 मेगावाट है। आमतौर पर संयंत्रों में 80 से 85 प्रतिशत ही उत्पादन क्षमता का लिया जाता है, लेकिन इस समय 90 से 92 फीसदी उत्पादन लिया जा रहा है। मड़वा की एक यूनिट के बंद होने के कारण इस समय अपने संयंत्रों में उत्पादन 22 से 23 सौ मेगावाट हो रहा है। यही वजह है कि सेंट्रल सेक्टर से ज्यादा बिजली लेनी पड़ रही है। वैसे सेंट्रल सेक्टर से छत्तीसगढ़ का शेयर साढ़े तीन हजार मेगावाट है। इतनी बिजली वहां से ली जा सकती है।



