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ख़ास ख़बर: कांग्रेस के महाधिवेशन से बढ़ा छत्तीसगढ़ का मान, नवा रायपुर में उतरा पूरा हिंदुस्तान

रायपुर. कांग्रेस के 85 वें राष्ट्रीय महाधिवेशन ने छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाने का काम किया है। यही नहीं नवा रायपुर में जब देश भर के राज्याें से प्रतिनिधि शामिल हाेने पहुंचे ताे उनकाे एक स्थान पर देखकर लगा मानो  पूरा हिंदुस्तान अपने राज्य की जमी पर उतर आया है।

अधिवेशन स्थल पर 36 पंडाल अलग-अलग राज्यों के नामों से लगाए गए हैं। इन पंडालों में अलग ही नजारा देखने को मिला। अलग-अलग राज्यों के लोग जब पंडालों पर पहुंचने लगे तो एक अलग ही नजारा नजर आया।सबसे ज्यादा करीब दो-दो हजार प्रतिनिधि उप्र और बंगाल के पहुंचे हैं। सबसे कम संख्या पांडिचेरी और सिक्किम की है। यहां से महज 50 प्रतिनिधि आए हैं। अधिवेशन स्थल पर एक लाइन से अलग-अलग राज्यों के नामों के साथ एक तरफ 32 और एक तरफ चार पंडाल मिलाकर कुल 36 पंडाल लगाए हैं। इन पंडालों में कुर्सियां लगाकर राज्यों के पदाधिकारियों को दी गई हैं। ये पदाधिकारी अपने राज्यों से आने वालों को सारी जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।

अलग नजारा दिखा
अलग-अलग राज्यों के सदस्य जब यहां पहुंचे तो वे एक-दूसरे राज्य के लोगों से मिलते रहे और उनसे परिचय प्राप्त करने के साथ उनके साथ फोटो लेते हुए भी नजर आए। राजस्थान के कुछ लोग राजस्थानी पगड़ी में अलग ही अंदाज में नजर आ रहे थे। कुछ राज्यों के पंडाल में उन राज्यों के स्थान पर दूसरे राज्य के लोग भी बैठे हुए मिले। इन्होंने बताया, अभी इन राज्य के लोग नहीं आए हैं और कुर्सियां खाली थीं तो हम लोग बैठ गए हैं।
छत्तीसगढ़ के पंडाल भारी भीड़
छत्तीसगढ़ के पंडाल में सबसे ज्यादा भीड़ नजर आई। यहां पर छत्तीसगढ़ पीपीसी के अध्यक्ष मोहन मरकाम पहुंचे थे। उनसे दूसरे राज्यों के कांग्रेसी नेता मिले और उनके साथ फोटो भी खिंचवाई। श्री मरकाम ने दूसरे राज्यों के लोगों से पूछा भी कहीं कोई परेशानी ताे नहीं है। सभी ने एक स्वर में व्यवस्था की तारीफ की।
किस राज्य से कितने प्रतिनिधि
जिन राज्यों से यहां पर प्रतिनिधि पहुंचे हैं, उनमें सबसे ज्यादा उप्र और बंगाल का नाम है। उप्र के तो तीन पंडाल लगे हैं। यहां के पदाधिकारियों ने बताया उनके राज्य से 18 सौ से ज्यादा लोग आए हैं। इसी तरह से बंगाल के लोगों ने बताया उनके राज्य से करीब दो हजार लोग पहुंचे है। अन्य राज्यों में मप्र से 700, महाराष्ट्र से 300, ओडिशा से 600, असम से 260, बिहार से 500 से ज्यादा लोग आए हैं। यहां के लोगों ने बताया, ट्रेनों की कुछ बोगियाें में हमारे ही लोग आए हैं। दिल्ली और गोवा से 280, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड से 200 से ज्यादा, गुजरात से 600 से ज्यादा, केरल से 400, राजस्थान से 600, उत्तराखंड से 310, हरियाणा से 250 प्रतिनिधि आए हैं। इसी के साथ तेलंगाना, तमिलनाडु, पंजाब, अंडमान निकोबार, चंडीगढ़, लक्षद्वीप, दादर नगर हवेली, मुंबई से भी भारी संख्या में प्रतिनिधि आए हैं। राज्यों से आने वाले प्रतिनिधि करीब दस हजार हैं।
चखा बस्तर कॉफी का स्वाद
बाहर के राज्यों से आए प्रतिनिधि अलग-अगल डोम में घुमते रहे। कुल लोगों से बस्तर कॉफी का स्वाद भी चखा। बस्तर काफी 50 रुपए में दी जा रही थी। कुछ लोगों ने आग्रह किया, पूरी काफी क्या करेंगे आधी दे दें भले 30 रुपए ले लें। मेहमानों को उनकी मांग के मुताबिक काफी दी गई। इस स्टाल में बस्तर के काजू और अन्य उत्पाद भी लोग लेते रहे।

खाने की व्यवस्था कहां है भाई, काेई ताे बताओ

बाहर के राज्य से आने वालों को भोजन स्थल खोजने में कुछ परेशानी का सामना करना पड़ा। पंडालों में बैठे लोगों के पास भी जानकारी नहीं थी कि भोजन स्थल कहां पर है। धीरे-धीरे लोगों तक इसकी जानकारी पहुंची की भोजन स्थल कहां पर है तो लोग वहां जाने लगे। भोजन स्थल भी खचा खचा भरा था, लेकिन किसी भी तरह से खाने को लेकर कोई परेशानी नहीं थी। खाना का स्वाद भी लोगों को अच्छा लगा।

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