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देश भर के व्यापारिक संगठन चाहते हैं केंद्रीय बजट में जीएसटी के सरलीकरण के साथ कई राहतें

रायपुर. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण दाे दिन बाद बुधवार काे से केंद्रीय बजट पेश करने वाली है। इस बजट से सभी वर्गों काे बड़ी आस है। ऐसे में देश भर के व्यापारिक संगठनों ने कई राहतों की मांग की है। कैट का राष्ट्रीय संगठन सबसे अहम जीएसटी का सरलीकरण चाहता है इसी के साथ एक राष्ट्र एक लाइसेंस की भी मांग सामने आई है।। अलग-अलग राज्यों के संघों ने भी अपनी मांगें रखीं हैं। बिहार राज्य से सोने पर एक्साइज ड्यूटी कम करने की मांग है। मप्र से ई-कॉमर्स नीति लाने की की मांग रखी गई है। छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स ने आयकर का स्लैब बदलने की मांग रखी है।
कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने बताया केंद्रीय मंत्री से बजट में जीएसटी कराधान प्रणाली की समीक्षा, खुदरा व्यापार से संबंधित सभी अधिनियमों और नियमों की समीक्षा, घरेलू व्यापार के लिए एक राष्ट्र-एक लाइसेंस नीति, व्यापारियों के लिए प्रभावी पेंशन योजना, उत्तर प्रदेश राज्य में लागू योजना के अनुसार व्यापारियों के लिए बीमा योजना, छोटे व्यवसायों के लिए अलग क्रेडिट रेटिंग मानदंड, बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों द्वारा व्यापारियों को वित्त की आसान पहुंच, व्यवसायों में आपसी भुगतान तथा आयकर अधिनियम की धारा 138 के तहत चेक का अनादर जैसे विवादों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन और देश मे स्पेशल ट्रेड जोन के निर्माण की मांग शामिल है।
दशकों पुराने नियमों बदले जाए: दोशी
कैट के प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र दोशी ने बताया, जीएसटी सबसे जटिल कराधान प्रणाली है और इस प्रणाली को सरल बनाने के लिए इसकी पूर्ण समीक्षा की आवश्यकता है ताकि जिसे व्यापारियों द्वारा सरलता में अनुपालित किया जा सके तथा सरकार को अधिक राजस्व की प्राप्ति हो सके। देश का खुदरा व्यापार बड़ी संख्या में अधिनियमों और नियमों से भरा हुआ है और उनमें से कई कुछ दशक पुराने हैं और वर्तमान परिदृश्य में अपना महत्व खो चुके हैं और इसलिए ऐसे सभी अधिनियमों और नियमों की समीक्षा की तत्काल आवश्यकता है। ऐसे नियम जो प्रासंगिकता खो चुके हैं उन्हें अवश्य निरस्त किया जाना चाहिए।
छत्तीसगढ़ से आयकर का स्लैब बदलने की मांग
छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष अमर पारवानी ने बताया हमने कई मांगें केंद्रीय बजट में रखी हैं। इसमें आयकर का स्लैब भी बदलने की मांग है। इसमें पांच लाख तक कोई टैक्स नहीं होना चाहिए। पांच से दस लाख तक पांच प्रतिशत, दस से 25 लाख तक दस प्रतिशत, 25 से 50 लाख तक 20 प्रतिशत और 50 लाख से ज्यादा पर 30 प्रतिशत टैक्स होना चाहिए। हाउसिंग लोन में ब्याज में छूट की सीमा दो से बढ़ाकर चार लाख करनी चाहिए।
मप्र से ई-कॉमर्स नीति की मांग
कैट मध्यप्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र जैन ने कहा, हमने केंद्रीय मंत्री से मांग की है, ई-कॉमर्स नियमों को लागू कर, ई-कॉमर्स नीति लाएं, ई-कॉमर्स नियामक प्राधिकरण का गठन हाे, खुदरा व्यापार के लिए राष्ट्रीय व्यापार नीति बने, केन्द्र एवं राज्य दोनों आंतरिक व्यापार के लिए एक अलग से मंत्रालय हो।
बिहार से सोने में एक्साइज ड्यूटी कम करने की मांग
बिहार कैट के अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा ने कहा, सोने में एक्साइज ड्यूटी 12 प्रतिशत होने के कारण कारोबार प्रभावित होता है। वैसे भी सोने की कीमत में लगातार इजाफा हो रहा है। हमारे संघ ने केंद्रीय बजट में एक्साइज ड्यूटी को पांच प्रतिशत करने की मांग की गई है। ऐसे होने से देश के सभी राज्यों को इसका लाभ मिलेगा।
दिल्ली से ब्याज में राहत की मांग
दिल्ली कैट के अध्यक्ष विपिन आहूजा ने बताया, हमारे संघ ने कारोबारियों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने की मांग रखी है।कारोबारियों को कम ब्याज दर पर आवश्यक वित्त प्रदान करके एनबीएफसी और एमएफआई को मजबूत करना चाहिए ताकिइन दोनों उधार देने वाली संस्थाओं को छोटे व्यवसायों को कम ब्याज दर पर पैसे मिल सके। ऐसी एकनीति छोटे व्यवसायों की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करेगी और खुदरा व्यापार में मदद करेगी।

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