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एक-एक करोड़ की घड़ी एक नंबर में खरीद रहे हैं रायपुरियंस

रायपुर(realtimes) आमतौर पर लाखों और करोड़ों में आने वाली चीजाें काे लाेग दाे नंबर के पैसों से ज्यादा खरीदते हैं, लेकिन रायपुरियंस तो यहां पर रोलेक्स के शोरूम में एक-एक करोड़ की घड़ी काे एक नंबर में खरीद रहे है। इसके पीछे का कारण यह है कि इस शाेरूम में नगद में घड़ियां बेची ही नहीं जाती है। पूरा का पूरा भुगतान चेक से लिया जाता है। 

राजधानी रायपुर में महंगी चीजों के शौकीनों की कमी नहीं है। यहां के लोग महंगी कारों के साथ महंगे मोबाइल ही नहीं बल्कि दुनिया में सबसे महंगी घड़ियों में शुमार रोलेक्स के भी दीवाने हैं। रायपुर के शोरूम में पांच लाख से एक करोड़ तक की घड़ी है। यहां के शोरूम में इतने कीमत वाली 42 घड़ियों बिकी गई हैं। फिलहाल यहां पर दो ही घड़ियां बची हैं। वैसे नया स्टॉक आने में समय नहीं लगेगा, लेकिन कई मॉडल ऐसे हैं जिनकी वेटिंग छह माह तक है। जिन लोगों ने पहले से इन मॉडलों की बुकिंग की है, उनको ही ये मॉडल मिल पाएंगे।देश भर में रोलेक्स के चाहने वाले हैं और इनके शोरूम देश भर के कई राज्यों में हैं। ऐसे राज्यों में छत्तीसगढ़ का भी नाम है। यहां पर भी रोलेक्स का शोरूम है। इस शोरूम में एक दर्जन से ज्यादा मॉडल मिल जाते हैं। लेकिन किसी भी मॉडल के लिए पहले से बुकिंग होती है। ज्यादातर कोई भी मॉडल तत्काल उपलब्ध नहीं हो पाता है। इसके पीछे का कारण यह है कि रोलेक्स की घड़ियों की रेंज चार लाख से प्रारंभ होती है। इससे कम रेंज के मॉडल रोलेक्स में नहीं मिलते हैं। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग मॉडल हैं।
दस लाख घड़ियां बनती है साल में
रोलेक्स घड़ियां पूरी दुनिया में बेची जाती है। इसके दीवाने बहुत है, लेकिन इसकी कीमत के कारण इनको ले पाना हर किसी के बस की बात नहीं है। सेलेब्रिटीज की खास पसंद होती हैं यह घड़ियां। लोग इसे स्टेटस सिंबल के तौर पर भी देखते हैं,इन घड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग स्विट्जरलैंड से होती है। कंपनी द्वारा हर साल 8 से 10 लाख कलाई घड़ियों का निर्माण किया जाता है। इसके डायल में व्हाइट गोल्ड का इस्तेमाल होता है। घड़ी में नंबर्स स्पेशल कांच के प्लेटिनम से तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा इसमें बेजेल सिरेमिक यानी चीनी मिट्टी का भी प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा रोलेक्स में जिस तरह के मटेरियल का इस्तेमाल किया जाता है वे काफी महंगी होते हैं। जैसे कि इनमें 940 एल स्टील का इस्तेमाल होता है, जबकि बाजार में मिलने वाली अन्य घड़ियों में 316 एल स्टील का इस्तेमाल किया जाता है। रोलेक्स मैकेनिकल घड़ियां बनाती हैं जिनमें मशीनरी का भरपूर इस्तेमाल होता है। इन्हें बनाना कोई आसान काम नहीं हैं। बहुत सुक्ष्मता से इन पर काम करना पड़ता जिससे इनकी कीमत अपने आप ही बढ़ जाती है।
डिमांड पर देते हैं मंगाकर
रायपुर में रोलेक्स के शोरूम के अलावा भी कुछ घड़ी बेचने वाले बड़े शोरूम हैं। इन शोरूम में भी साल में आधा दर्जन ग्राहक रोलेक्स घड़ियों के लिए पहुंचते हैं। एक दुकान के संचालक ने बताया, ग्राहक की मांग पर वे उनको उनकी पसंद के मॉडल मंगाकर देते हैं। आमतौर पर इन दुकानों में शुरुआती चार से पांच लाख के मॉडल ही ज्यादा बिकते हैं। इससे ज्यादा वाले मॉडल शोरूम में या फिर रायपुर के बाहर से भी लोग लेकर आते हैं।

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