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नगरीय चुनाव में 66.42 प्रतिशत वोटिंग, बढ़ सकता है ये आंकड़ा

प्रदेश में आमतौर पर शांति से हुआ चुनाव,24 को मतगणना
कांग्रेस भाजपा के कई नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर

रायपुर(realtimes) छत्तीसगढ़ में नगरीय निकायों के लिए शनिवार को हुए मतदान के दौरान राज्य के 66.41 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। राज्य निर्वाचन आयुक्त ठाकुर राम सिंह ने देर शाम मीडिया को यह जानकारी देते हुए कहा है कि मतदान के आंकड़े अंतरिम हैं। ऐसी संभावना है कि सभी मतदान केंद्रों की रिपोर्ट आने के बाद ये आंकड़ा बढ़ भी सकता है। मतदान के दौरान छुटपुट घटनाओं को छोड़कर आमतौर पर ये पूरा चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से हुआ। चुनाव प्रचार अभियान के बीच भी किसी प्रकार का कोई गंभीर मामला या विवाद सामने नहीं आया। इन चुनाव में मुख्य मुकाबला राज्य की सत्ताधारी कांग्रेस व भाजपा के बीच होता दिख रहा है। कुछ स्थानों पर स्थानीय दल न निर्दलीय भी चुनाव मैदान में अपनी ताकत दिखाते रहे।

अब असली चुनाव मेयर का

राज्य में नगरीय निकाय चुनावों के पहले राज्य सरकार ने चुनाव प्रणाली में बदलाव किया है। इस बार मेयर का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से होगा। इससे पहले मेयर को सीधे जनता प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनती रही है। अब चुने हुए पार्षद अपने बीच से मेयर का चुनाव करेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि इन चुनाव में सत्ताधारी कांग्रेस कितने  निगम,पालिका में मेयर व अध्यक्ष काबिज करवा पाती है। दोनों मुख्य दलों ने चुनाव में अपनी पूरी ताकत झौंकी है। 24 तारीख को इन चुनावों का परिणाम आएगा। नतीजों से साफ होगा कि किस दल के कितने पार्षद चुने गए। इसके बाद ही मेयर की लिए दांवपेंच तेज होंगे।

रायपुर में इनकी प्रतिष्ठा दांव पर

जहां तक रायपुर नगर निगम का सवाल है यहां से कांग्रेस के मौजूदा मेयर प्रमोद दुबे की प्रतिष्ठा दांव पर है। मेयर रहते वे पार्षद चुनाव के मैदान में हैं। उनके साथ-साथ कांग्रेस विधायक सत्यनारायण शर्मा,कुलदीप जुनेजा,विकास उपाध्याय की प्रतिष्ठा पर दांव इसलिए है कि माना जा रहा है कि इन नेताओं ने अपने अपने विधानसभा क्षेत्र के वार्डों में अपनी पसंद के प्रत्याशी उतारे हैं। अगर कांग्रेस के प्रत्याशी जीते तो क्रेडिट इनके खाते में जाएगा, वरना हार का ठीकरा भी इन्हीं नेताओं के सिर फूटेगा।

दूसरी ओर भाजपा ने भी इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत लगाई है, लेकिन निगम की सियासत में पिछले दो चुनावों में कांग्रेस मेयर की जीत के साथ ही भाजपा की राजनीति कमजोर साबित हुई थी। दरअसल भाजपा आंतरिक गुटबाजी के कारण भी निगम में हारती रही है। भाजपा के प्रमुख उम्मीदवारों में राजीव अग्रवाल, संजय श्रीवास्तव,प्रफुल्ल विश्वकर्मा सहित कुछ अन्य नेता मेयर पद की दावेदारी के लिए वार्ड में उतरे हैं।

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