खास खबर: नए कृषि पंप कनेक्शन के लिए करना होगा तीन साल का लंबा इंतजार

रायपुर(realtimes) प्रदेश के किसानों को कृषि पंपों के लिए स्थाई कनेक्शन लेने के लिए अब लंबा इंतजार करना पड़ेगा। कोई किसान आज आवेदन करेगा तो उसे तीसरे साल में ही कनेक्शन मिल पाएगा। इस समय 50 हजार से ज्यादा आवेदन पेंडिंग हैं। 2022-23 के सत्र के लिए मिले 150 करोड़ के बजट में ज्यादा से ज्यादा 20 हजार कनेक्शन ही लगेंगे। यह भी तय है कि जहां इतने कनेक्शन लगेंगे, वहीं इससे ज्यादा आवेदन भी आ जाएंगे। प्रदेश सरकार ने अगर अगले साल के बजट में ज्यादा बजट दे दिया तो संभव है कि ज्यादा कनेक्शन लग जाएं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर पिछले सत्र में 36 हजार से ज्यादा कनेक्शन लगे थे। अब एक बार फिर से किसानों काे मुख्यमंत्री से ही उम्मीद है कि वे पहल करेंगे तो इस सत्र और अगले सत्र में पेंडिंग आवेदनों के सारे कनेक्शन लग सकते हैं।
प्रदेश के किसानाें के लिए पिछले साल से पहले तक कृषि पंप कनेक्शन दूर की कौड़ी थे, लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस राह को पिछले साल आसान कर दिया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर प्रदेश में कृषि पंपों के पेंडिंग 36 हजार से ज्यादा आवेदनों का निपटारा करने में जब कंपनी जुटी तो पहली बार साल भर में ही रिकाॅर्ड 36 हजार 730 कनेक्शन दिए गए। इसके पहले कभी इतने ज्यादा कनेक्शन एक साल में नहीं दिए गए। इतिहास में पहली बार कंपनी ने पिछले साल जून में ही 12 हजार कनेक्शन देने में सफलता प्राप्त की। इसके बाद दूसरे माह छह हजार और कनेक्शन दिए गए। दो माह में रिकॉर्डतोड़ 18 हजार 340 कनेक्शन दिए गए। इसके बाद मानसून के साथ फसल का समय आने पर कनेक्शनों का काम बंद हो गया, लेकिन इधर जैसे ही फसल की कटाई के बाद खेत खाली हुए तो फिर से कनेक्शन देने का काम प्रारंभ किया गया। दो माह में करीब और 12 हजार कनेक्शन देकर पेंडिंग आवेदनों में से 30 हजार का निपटारा कर दिया गया। फरवरी और मार्च में बचे पेंडिंग आवेदनों का पूरा निपटारा करके लक्ष्य पूरा किया गया।
पेंडिंग आवेदनों के लिए चाहिए चार सौ करोड़
प्रदेश सरकार ने विधानसभा में जो जानकारी दी है, उसके मुताबिक इस समय प्रदेश में 50 हजार 250 कृषि पंपों के आवेदन पेंडिंग हैं। इनमें से इस साल 20 हजार कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें से अब तक करीब पांच हजार कनेक्शन दिए जा चुके हैं। बचे 15 हजार आवेदनों का निपटारा अगले साल मार्च तक करना है। पॉवर कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक एक कृषि पंप कनेक्शन पर करीब एक लाख का खर्च आता है। अगर प्रदेश सरकार सारे पेंडिंग आवेदनों का निपटारा करने का मन बनाती है तो इसके लिए करीब चार सौ करोड़ की दरकार होगी। आमतौर पर हर साल कृषि पंपों के लिए 150 से 200 करोड़ तक का बजट मिल पाता है। इसमें 15 से 20 हजार कनेक्शन ही लग पाते हैं।
अस्थाई कनेक्शन से चला रहे काम
जिन किसानों को कृषि पंप की जरूरत होती है और जिनके खेतों के आस-पास खंबे होते हैं, उनको अस्थाई कनेक्शन मिल जाते हैं। इसके लिए उनको ज्यादा मशक्कत भी करने की जरूरत नहीं पड़ती है। इसमें ज्यादा खर्च भी नहीं आता है, खंभे से उनके खेत तक लगने वाली तार के साथ ही मीटर के लिए जमा की जाने वाली सुरक्षा निधि लगती है। इन किसानों को भी स्थाई कनेक्शनों की तरह ही तीन एचपी वाले पंप पर साल भर में छह हजार और पांच एचपी वाले पंप पर साढ़े सात हजार बिजली मुफ्त मिलती है।



