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लोकसभा में नागरिकता बिल पेश, पक्ष में 293 वोट

नई दिल्ली/एजेंसी(realtimes) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश किया। जोरदार हंगामे के बीच सोमवार को जब बिल पेश हुआ तो विपक्ष की ओर से इस पर मतदान की मांग की गई है।

विपक्ष के एक सवाल पर अमित शाह ने कहा- हमें तीनों देशों (अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश) के संविधान को समझना होगा। तीनों देश के संविधान के अंदर राज्य के धर्म का जिक्र है। तीनों राष्ट्रों के अंदर अल्पसंख्यकों के साथ धार्मिक प्रताड़ना हुई है।

अमित शाह ने कहा कि यह अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं करता है और मैं इस सदन और देश को आश्वस्त करना चाहता हूं कि यह यह समानता के अधिकार का विरोधी नहीं है और इससे समानता का अधिकार आहत नहीं होगा। लेकिन तर्कसंगत वर्गीकरण के आधार पर कोई हमें कानून बनाने से नहीं रोक सकता है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1971 में बंगलादेश से आए लोगों को भारत में शरण दी थी और युगांडा से आए लोगों को भी कांग्रेस के शासनकाल में शरण दी गई थी। श्री राजीव गांधी ने असम समझौते में 1971 तक के लोगों काे ही स्वीकार किया था।

शाह ने सदन को आश्वस्त किया कि इन देशों के मुसलमान भी कानून के आधार पर नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं और उनके आवेदनों पर भी प्रक्रिया के तहत विचार किया जायेगा। इस पर कोई रोक नहीं लगेगी। गृहमंत्री ने कहा कि वह विपक्षी सदस्यों के विधेयक की विषयवस्तु से जुड़े सभी सवालों का जवाब विधेयक पर चर्चा के दौरान विस्तारपूर्वक देंगे। करीब डेढ़ घंटे तक विपक्षी सदस्यों के तीखे विरोध एवं संविधान की मूल भावना के उल्लंघन के आरोपों के बाद श्री शाह को जवाब देने का मौका मिला।

जवाब के बाद जब उन्होंने विधेयक को सदन में पेश करने की अनुमति मांगी तो विपक्ष के कई सदस्यों ने मतविभाजन की मांग की। मत विभाजन में 375 सदस्यों ने भाग लिया जिनमें से 82 ने विरोध में और 293 ने पक्ष में मतदान किया। एआईआईएमएल नेता असददुीन औवेसी ने कहा कि यह देश के धर्मनिरपेक्षता के ढांचे पर हमला है और मूल ढांचे का उल्लंघन करता है। इस कानून के पारित हाेने से देश का नुकसान होगा। जानकारी के लिए बता दें जब लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल वोटिंग हुई तो बिल पेश करने के पक्ष में 293 और विरोध में 82 वोट पड़े।

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