रायपुर-बस्तर परिवहन संघ के विवाद के बीच गैरेज वालों की चांदी

रायपुर(realtimes) बस्तर का परिवहन विवाद आये दिन अखबारों की सुर्खियां बना रहता है इस व्यवसाय में एकाधिकार पाने कई बार सड़कों पर खुलेआम दंगल मच चुका है नगरनार प्लांट में एकाधिकार जमाने को लेकर भी दो पक्षों में खुटपदर में गोली तक चल चुकी है।
एकाधिकार की लड़ाई में जब बात इतनी बढ़ी तो तत्कालीन सरकार द्वारा जगदलपुर बस्तर परिवहन संघ में ताला बंदी तक हो चुकी है।
तालाबंदी के बाद इस व्यवसाय पर निर्भर जगदलपुर से रायपुर राजधानी तक सिंगल ट्रक मालिकों पर रोजीरोटी का संकट खड़ा हो गया था।
बस्तर से रायपुर तक मनमाने माल भाड़ो में चलने वाले ट्रक मालिक ट्रक यूनियन में तालाबंदी के बाद आपसी प्रतिस्पर्धा में रायपुर से 500 , 600 रुपए प्रति टन में माल परिवहन करने लगे थे आधे से ज्यादा ट्रक मालिक जो इस व्यवसाय पर निर्भर थे उनकी हालात बहुत ज्यादा ख़राब हुई थी, व्यापारी वर्ग जो साइड कमाई के लिए ट्रक व्यवसाय में जुड़ा था ज्यादा लाभ ना दिखने की वज़ह से पुरी तरह किनारा कर लिया था।
उस समय राज्य में विधानसभा चुनाव चल रहे थे तभी परिवहन संघ में तालाबंदी का मुद्दा भी उठा कुछ विरोध व कुछ राजनीतिक पार्टीयां समर्थन में थी।
राज्य में सरकार बदलने पर नई कांग्रेस सरकार से परिवहन संघों को दुबारा शुरू करने ट्रक मालिकों ने गुहार लगाई
जिस मुख्यमंत्री भुपेश बघेल द्वारा हज़ारों परिवारों की रोजीरोटी को देखते हुए जगदलपुर – रायपुर में कई हिदायत देते हुए चालू करवाया गया पर जैसे ही माल भाड़े बढ़ने शुरू हुए लालच स्वार्थ पर ट्रक मालिक फिर भिड़ना शुरू हो गये।
कई बार प्रशासन व परिवहन मंत्री जी द्वारा मध्यस्थता करवा कर विवाद को शांत करवाया गया व रायपुर और बस्तर के बीच परिवहन व्यवसाय सुचारू रूप से चले नये नियम माल बंटवारे को लेकर बनवाये गये।
कुछ माह गुजरने के बाद फिर विवाद खड़ा होने लगा है क्या है नया विवाद
रायपुर परिवहन संघ के लोगों का कहना है कि बस्तर परिवहन संघ के कुछ सदस्य जिनकी संख्या महज 5 या 6 है उनके रायपुर में चिल्हर परचून बुकिंग गैरेज है वह जगदलपुर से तो (ट्रक यूनियन) बस्तर परिवहन संघ के क्यूं सिस्टम से माल भरकर आना चाहते हैं पर वापसी में रायपुर क्यूं सिस्टम तोड़कर मनमाने तरीके से चलना चाहते हैं परचून चिल्हर की आड़ में थोक किराना, टाइल्स, लोहा, गुड़ , चना , चावल सब डायरेक्ट लोड़ कम भाड़े में कर रहे हैं रायपुर परिवहन संघ का कहना है बस्तर परिवहन संघ अपने सदस्यों पर कार्यवाही करे।
जिसके चलते सिंगल ट्रक मालिकों को हफ्तों रायपुर में नंबर नही आ रहा है ट्रक मालिक रायपुर परिवहन संघ में इसका विरोध कर रहे हैं जिसके चलते रायपुर पदाधिकारियों ने कुछ गैरेज वालों को ऐसा करने मना किया गया पर वह रायपुर परिवहन संघ के पदाधिकारियों पर गुंडागर्दी का आरोप लगाने लगें स्वतत्र चलने की मांग करने लगे।
रायपुर परिवहन संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि एक ही परिवार के कुछ लोगों का रायपुर में अलग अलग नाम से गैरेज है वह अपने लालच स्वार्थ में यह सब कर रहे हैं। जो गैरेज वाले रायपुर परिवहन संघ से ट्रके लेकर काम कर रहे हैं उनका कहना है कि हमको यूनियन भाड़ा 950/रुपए प्रति टन देना पड़ता है व जो गैरेज वाले डायरेक्ट चल रहे हैं वह 700, 800 रुपए में काम कर रहे हैं व्यापारी हमको क्यों लोड़ देगा हमारे व्यवसाय पर भी असर पड़ रहा है सरकार यदि परिवहन संघों को चलाना चाहते हैं तो सबके लिए सामान्य नियम होने चाहिए।
जो लोग ऐसा कर रहे हैं वह अपने स्वार्थ लालच कभी वह बस्तर परिवहन संघ में वोट करने ट्रक मालिक बन जाते हैं और जिंदाबाद करने लगते हैं कभी वह बस्तर चेंबर ऑफ कॉमर्स में व्यापारी बनकर व्यापार बचाओ करने लगते हैं कभी वह ट्रांसपोर्टर कमीशन एजेंट बन जाते है कभी रायपुर में परचून गैरेज यूनियन की भूमिका में होते हैं सिर्फ अपने स्वार्थ लालच में लोगों को बरगलाने का काम करते हैं।
विवाद पैदा करने वालो पर करें कार्यवाही
व्यापारीयों इस विवाद पर क्या है कहते क्या कारण है कि बस्तर में परिवहन व्यवसाय बंधा हुआ है एकाधिकार में है
व्यापारीयों से इस संबंध पर बात करने पर उनका कहना है कोई भी व्यापार खुला होना चाहिए पुरे देश के हर नागरिक को पुरा अधिकार है कि वह कहीं भी किसी भी राज्य में जाकर स्वतंत्र रूप से अपना कोई भी व्यापार कारोबार कर सकता है किसी से भी करवा सकता है पुरे देश में परिवहन व्यवसाय स्वतंत्र रूप से चल रहा है क्या ट्रक मालिक कमा खा नहीं रहे हैं माला भाड़ा डिमांड सप्लाई पर निर्भर रहता है काम के हिसाब से घटता बढ़ता है पर बस्तर पुरे साल बढ़ता ही रहता है जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है।
ज्यादा माल भाड़े का क्या खेल है
एक ट्रांसपोर्टर ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि जगदलपुर से आयरन ओर का 1500/ रुपए प्रति टन भाड़ा है
10 चक्का ट्रक 20 टन पासिंग
1500 प्रति टन × 20 टन = 30000/
12 चक्का पासिंग 26 टन= 39000/
14 चक्का पासिंग 30 टन =45000/
खर्चा रायपुर तक 100 से 120 लीटर डीजल 1000 रुपए टोल टैक्स में ट्रक 12 से 13 हज़ार के खर्च में खाली हो जाती है अगर खाली भी आती है तो पैसा बचता है और रायपुर तरफ से आने में 700 ,800 रुपए प्रति टन में भी लोड़ मिल जाए तो सोने पर सुहागा जैसी बात है यह ट्रिप लगाने हमेशा झगड़ते हैं ट्रक मालिक और यह 18 , 20 साल से चला आ रहा है इसके पीछे लालच स्वार्थ है
हमेशा छोटे ट्रक मालिक नंबर लगाकर खड़ा रहता है बड़े ट्रांसपोर्टर गैरेज वाले ही नियम तोड़कर चोरी करते हैं झगड़ते माहौल खराब करते हैं।
पुरे छत्तीसगढ़ में बस्तर में ही क्यों है परिवहन संघ ट्रक यूनियन क्यूं सिस्टम
आधे से ज्यादा छत्तीसगढ़ में ट्रांसपोर्ट व्यवसाय खुला है बिना रोक टोक खुला चलता है सरगुजा संभाग, कोरबा , रायगढ़, जशपुर, बिलासपुर दुर्ग भिलाई, रायपुर, जिनमें ट्रक मालिकों की संख्या कहीं ज्यादा है बस्तर की अपेक्षा और ट्रांसपोर्टर भी संपन्न है। बस्तर में यह परिवहन व्यवसाय 1980 के दशक सिर्फ पंजाबी ज़्यादा सरदार भाई ही करते थे तब रायपुर से बस्तर रोजमर्रा का सामान परचून ही आता था वापसी में जंगल से लकड़ी वनोपज परिवहन रायपुर की तरफ होता था तब से ही ट्रक यूनियन बस्तर में संगठित हुए हैं
बस्तर में परिवहन विवाद का क्या है ठोस हल कैसे सुलझेगा यह विवाद
इस मामले के जानकार ने बताया कि इस में प्रशासनिक स्तर पर हो चार पक्षों की बैठक
(1) ट्रक यूनियन परिवहन संघ से जुड़े लोग
(2) छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स बस्तर चेंबर व्यापारी संगठन
(3) छत्तीसगढ़ स्पंज आयरन एसोसिएशन के सदस्य
(4) छत्तीसगढ़ सीमेंट मेन्यूफेक्चरिंग एसोसिएशन
चार पक्षों की बात सुनकर जिनका इस विवाद से व्यापार प्रभावित होता है प्रशासनिक अधिकारी लें फैसला
स्वतंत्र परिवहन व्यवस्था ही आखिरी हल है।



