रायपुर को स्मार्ट बनाने बिजली के तारों को अंडरग्राउंड करने की कवायद - realtimes
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रायपुर को स्मार्ट बनाने बिजली के तारों को अंडरग्राउंड करने की कवायद

रायपुर(realtimes) राजधानी रायपुर में को स्मार्ट बनाने की कवायद चल रही है। एक तरफ जहां स्मार्ट सिटी योजना में शहर के कई हिस्सों को बिजली के तारों से मुक्त करने का काम प्रारंभ हो गया है, वहीं छत्तीसगढ़ राज्य पावर कंपनी ने भी एक बड़ी योजना तैयार की है। इस समय कोतवाली से मालवीय रोड होते हुए जयस्तंभ चौक तक के तारों को हटाने का काम प्रारंभ हो गया है। इसी के साथ जयस्तंभ चौक से फाफाडीह तक की सड़क के भी बिजली तार हटाए जाएंगे। बूढ़ा तालाब के चारों तरफ की सड़क को भी बिजली के तारों से मुक्त किया जा रहा है।
राजधानी को स्मार्ट सिटी बनाने के दिशा में कई काम हो रहे हैं। शहर के अंदर बिजली के तारों का जाल बिछा हुआ है। अलग-अलग योजनाएं बनाकर बिजली के तारों को हटाने की योजना पर काम हो रहा है। दो योजनाओं पर स्मार्ट सिटी खुद काम कर रही है। इसमें बूढ़ा तालाब के चारों तरफ के तारों को अंडरग्राउंड करने का काम चल रहा है। इसका काम अंतिम चरण में है। इसके पहले स्मार्ट सिटी ने पॉवर कंपनी को आधा दर्जन से ज्यादा मार्गों के तारों को अंडरग्राउंड करने का काम दिया था, पर इसके टेंडर में गड़बड़ी के कारण पावर कंपनी से स्मार्ट सिटी ने पैसे वापस भी ले लिए हैं। अब इस पर स्मार्ट सिटी खुद काम करेगी। इस कड़ी में पहला काम जयस्तंभ चौक से फाफाडीह चौक तक तारों को अंडरग्राउंड की 8 करोड़ तीन लाख की योजना है। इसी के साथ कोतवाली से जयस्तंभ चौक की पांच करोड़ की योजना पर काम प्रारंभ हो गया है।
930 करोड़ की बड़ी योजना
फुंडहर से तेलीबांधा, जयस्तंभ चौक होते हुए टाटीबंध तक के बिजली के तारों को अंडरग्राउंड किया जाएगा। इस योजना में 930 करोड़ खर्च होंगे। योजना को राज्य सरकार से मंजूरी के बाद अब केंद्र सरकार के पास भेजा गया है। वहां से मंजूरी मिलने पर केंद्र सरकार से योजना में 60 फीसदी मदद मिलेगी। 10 फीसदी मदद राज्य सरकार करेगी और बाकी का 30 फीसदी खर्च पॉवर कंपनी को करना पड़ेगा। योजना में फुंडहर से राम मंदिर के पास वीआईपी चौक से तेलीबांधा, मरीन ड्राइव, भगत सिंह चौक, नगर घड़ी, शास्त्री चौक, जयस्तंभ चौक, तात्यापारा चौक, आजाद चौक, रविशंकर विश्वविद्यालय, महोबा बाजार होते हुए टाटीबंध चौक तक के पूरे मार्ग के तारों को अंडरग्राउंड किया जाएगा। इसका पूरा डीपीआर तैयार हो गया है। योजना को राज्य सरकार ने मंजूरी भी दे दी है। राज्य सरकार से मंजूरी का मतलब यह है कि वह इस योजना के लिए दस फीसदी मदद देने के लिए तैयार है। अब केंद्र सरकार से मंजूरी के बाद योजना प्रारंभ होगा। लेकिन केंद्र सरकार योजना के बजट में कटौती भी कर सकती है। वहां से जितने की योजना मंजूर होगी उसके हिसाब से टेंडर करके काम किया जाएगा।

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