बिजली की योजनाओं के लिए बनी कमेटियां केवल नाम की,अब तक एक भी बैठक नहीं

रायपुर . केंद्र सरकार ने हर जिले में एक कमेटी बनाने का फरमान जारी किया है। इसके बाद छत्तीसगढ़ के पुराने 28 जिलों में तो कमेटी बन गई है, लेकिन अब तक नए जिलों में कमेटी नहीं बन पाई है। जिन जिलों में कमेटी बनी है, वहां पर कमेटी बस नाम की है, नियम के मुताबिक तीन माह में होने वाली बैठक नहीं हो रही है। रायपुर के सांसद सुनील सोनी के मुताबिक कई बार कहने के बाद भी कमेटी की बैठक नहीं की जा रही है। इस कमेटी में जिले के सांसद और विधायकों को अध्यक्ष बनाया गया है। इसी के साथ कमेटी में कलेक्टर सचिव हैं। विधायकों के साथ पंचायतों के भी जनप्रतिनिधियों को कमेटी में रखा गया है। यह कमेटी इसलिए और जरूरी हो गई है क्योंकि हर राज्य में स्मार्ट मीटर की योजना लागू हो रही है। अपने राज्य में यह योजना प्रारंभ हो रही है।
केंद्र सरकार की आरडीएसएस के तहत कई तरह की योजनाएं राज्यों में चलती हैं। राज्य सरकार जो भी योजना बनाती है, उसको केंद्र सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजती है। अलग-अलग योजनाओं में केंद्र सरकार से अलग-अलग प्रतिशत में योगदान मिलता है, किसी योजना में 60 प्रतिशत तो किसी में इससे कम का योगदान केंद्र सरकार का रहता है। केंद्र सरकार जिन भी योजनाओं में योगदान देती है, उन योजनाओं की देखरेख के लिए भी हर जिले में कमेटी बनाने के लिए कहा गया है, ताकि योजना पर ठीक से काम हो सके।
सात हजार करोड़ की योजना मंजूर
प्रदेश सरकार ने पिछले साल राज्य में बिजली व्यवस्था को मजबूत करने और स्मार्ट मीटर को लेकर केंद्र सरकार को 12 हजार करोड़ की योजना भेजी थी। इसमें से पहले साढ़े तीन हजार करोड़ की योजना को मंजूरी मिली, इसके बाद स्मार्ट मीटर योजना को भी मंजूरी मिली है। कुल मिलाकर करीब सात हजार करोड़ की योजना को मंजूरी मिली है।
स्मार्ट मीटर की बड़ी योजना
केंद्र सरकार की स्मार्ट मीटर योजना बड़ी योजना है। हर राज्य में अनिवार्य रूप से स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं। इसको लेकर केंद्र सरकार ने राजपत्र में भी इसका प्रकाशन कर दिया है। जो स्मार्ट मीटर लगेंगे उनकी कीमत छह हजार रुपए है। इस योजना में केंद्र सरकार 15 प्रतिशत का योगदान कर रही है। योजना को निजी कंपनियों से ही पूरा कराया जा रहा है। इस योजना को ठीक से लागू कराने के लिए कमेटी जरूरी है। अपने राज्य में यह योजना चार हजार कराेड़ की है।
सांसद अध्यक्ष, कलेक्टर सचिव
जिलों में बनाई गई इलेक्ट्रिक सिटी कमेटी में जिले के सीनियर सांसद को अध्यक्ष, इसके बाद अगर जिले में जूनियर सांसद हैं तो उनको सह अध्यक्ष बनाने का नियम है। कमेटी के सचिव कलेक्टर होते हैं। इसके अलावा कमेटी में विधायक, पंचायत अध्यक्ष और केंद्र सरकार अपना एक प्रतिनिधि नियुक्ति करती है। इसी के साथ बिजली विभाग का एक अधिकारी कवेंयर रहता है। इस कमेटी की तीन माह में एक बार अनिवार्य रूप से बैठक करनी है। बैठक में जिले में चलने वाली केंद्र सरकार की बिजली योजनाओं की समीक्षा की जाती है।



