भाजपा का फोकस नए चेहरों पर, 21 में से 16 नए प्रत्याशी

रायपुर(realtimes) भाजपा का राष्ट्रीय संगठन इस बार छत्तीसगढ़ में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव में हर हाल में जीत प्राप्त करना चाहता है। भाजपा का बड़ा फोकस इस बार नए चेहराें पर है। यही वजह है कि इतिहास में पहली बार भाजपा ने आचार संहिता लगने के काफी पहले ही 21 सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है। इसमें से 16 नए चेहरों पर भाजपा ने दांव खेला है। इसी के साथ पांच पुराने चेहरों को भी मैदान में उतारा है।
सबसे अहम दुर्ग के सांसद विजय बघेल को एक बार फिर से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ खड़ा किया है। यह चौथा मौका होगा, जब चाचा और भतीजा आमने-सामने होंगे। 21 में से 19 सीटें ऐसी हैं जहां पर भाजपा दो या इससे ज्यादा बार नहीं जीत सकी है। इसी के साथ मरवाही और खरसिया की सीट ऐसी हैं जहां पर भाजपा को कभी भी जीत नहीं मिली है।
पहली बार तीन माह पहले ही प्रत्याशी तय
भाजपा ने विधानसभा चुनाव को अलग ही रणनीति से लड़ने का फैसला किया है। ऐसा पहली बार हो रहा है कि चुनाव के तीन माह पहले ही प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी गई है। इसके बारे में किसी ने कल्पना भी नहीं थी। यह भी पहली बार हुआ है कि सीधे केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में प्रत्याशियों का फैसला किया गया है। प्रदेश चुनाव समिति की तरफ से कोई नाम तय नहीं किए गए थे। लेकिन संभागों से सीधे नाम मंगवाए गए थे।
चाचा के खिलाफ चौथी बार भतीजा मैदान में
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारे गए विजय बघेल तीन बार पहले भी पाटन से चुनाव लड़ चुके हैं। सबसे पहले 2003 में स्वर्गीय विद्याचरण शुक्ल की पार्टी राकांपा से चुनाव लड़े और भूपेश बघेल से हार गए। इसके बाद भाजपा ने उनको 2008 में मैदान में उतारा तो भूपेश बघेल को मात देकर वे चुनाव जीते और संसदीय सचिव बने। 2013 में वे एक बार फिर से भूपेश बघेल से हार गए। पिछले चुनाव में भी वे पाटन से चुनाव लड़ना चाह रहे थे, पर पार्टी ने उनको टिकट नहीं दिया था, लेकिन अब उनको वापस पार्टी ने टिकट दिया है।
इन पुराने चेहरों पर जताया भरोसा
भाजपा ने पुराने चेहरों में प्रदेश के पूर्व मंत्री और पूर्व राज्यसभा सांसद आदिवासी नेता रामविचार नेताम पर भरोसा जताकर उनको मैदान में उतारा है। इसी के साथ मोहला मानपुर से संजीव साहा को, सिहावा से श्रवण मरकाम, कोरबा से लखन देवांगन पर पार्टी ने भरोसा जताया है।
कभी न जीतने वाली चार सीटें बाकी
भाजपा का बड़ा फोकस उन सीटों पर भी है जिन पर कभी भाजपा को जीत नहीं मिली है। प्रदेश में ऐसी छह सीटें हैं जहां पर भाजपा को छत्तीसगढ़ बनने के बाद कभी जीत नहीं मिली है। इन सीटों में से खरसिया और मरवाही पर तो प्रत्याशी घोषित हो गए हैं। लेकिन अभी चार सीटें सीतापुर, पाली तानाखार, कोंटा और कोटा बाकी हैं। इन सीटों पर भी भाजपा के प्रत्याशी जल्द घोषित होने की संभावना है।
दस एसटी सीटें तय
भाजपा ने जिन 21 सीटों का ऐलान किया है, उसमें से 10 एसटी सीटें और एक एससी सीट है। बाकी की दस सीटें सामान्य हैं। भाजपा का बड़ा फोकस आदिवासी सीटों पर भी है। यही वजह है कि भाजपा ने पहले ही चरण में दस सीटों पर प्रत्याशी तय किए हैं। इसमें से बस्तर संभाग की दो सीटें हैं। इसी के साथ सरगुजा संभाग की तीन सीटें एसटी और दो सामान्य वर्ग की घोषित हुई हैं। दुर्ग और बिलासपुर संभाग से दो-दो और रायपुर संभाग से एक एसटी की सीट तय हुई है। एक एससी सीट सरायपाली की है।



