परंपरागत खेती से हटकर नवाचार की राह, गेंदा फूल ने संवारी आर्थिक स्थिति - realtimes
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परंपरागत खेती से हटकर नवाचार की राह, गेंदा फूल ने संवारी आर्थिक स्थिति

 

रायपुर, 19 जनवरी 2026 छत्तीसगढ़ शासन की किसान हितैषी योजनाएं और उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन से अब किसान परंपरागत खेती से आगे बढ़कर अधिक लाभकारी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। इसका उदाहरण सारंगढ़ जिले के ग्राम बरगांव के कृषक श्री देवानंद निषाद हैं, जिन्होंने रबी मौसम में धान के स्थान पर मेरीगोल्ड (गेंदा) की खेती अपनाकर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

कृषक देवानंद निषाद ने वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजनांतर्गत पुष्प क्षेत्र विस्तार के अंतर्गत गेंदा की खेती की। वे विगत दो वर्षों से उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में रबी मौसम में गेंदा की फसल ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले वे रबी फसल में धान की खेती करते थे, जिससे प्रति एकड़ लगभग 20 क्विंटल उत्पादन होता था। लागत की तुलना में लाभ नाम मात्र था। 

गेंदा की खेती से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्तमान में वे एक एकड़ क्षेत्र में गेंदा की खेती कर रहे हैं। इस पर लगभग 50 हजार रुपये प्रति एकड़ लागत आई, जबकि 3750 किलोग्राम गेंदा फूल का उत्पादन प्राप्त हुआ। औसतन 80 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बिक्री कर उन्होंने लगभग 3 लाख रुपये की कुल आमदनी अर्जित की, जिससे उन्हें लगभग 2.5 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।

कृषक देवानंद निषाद प्रतिदिन 60 से 70 किलोग्राम गेंदा फूल रायगढ़ फूल बाजार में विक्रय के लिए ले जाते हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत उन्हें गेंदा के पौधे उपलब्ध कराए गए तथा उद्यानिकी विभाग द्वारा समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया गया, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में वृद्धि हुई। गेंदा की खेती से आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होने के बाद ग्राम बरगांव के अन्य किसान भी प्रेरित हुए हैं और अब रबी मौसम में धान के स्थान पर गेंदा जैसी लाभकारी पुष्प फसलों की खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं। 

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