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हाईकोर्ट ने EOW को आरटीआई के दायरे में शामिल करने दिए निर्देश…

कहा- ऐसी संस्था को सूचना के अधिकार से मुक्त नहीं किया जा सकता

रायपुर।  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को सूचना के अधिकार के दायरे में लाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सामान्य प्रशासन विभाग को निर्देशित किया है कि पहले जारी अधिसूचना को निरस्त कर EOW को आरटीआई के दायरे में शामिल करें। हाईकोर्ट ने आरटीआई कार्यकर्ता राजकुमार मिश्रा की रिट याचिका पर यह फैसला सुनाया है।

डिवीजन बेंच ने कहा कि भ्रष्टाचार और मानव अधिकारों के हनन की सूचना देने वाली संस्था को इस तरह से RTI के दायरे से अलग नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही कोर्ट ने 8 साल पहले प्रस्तुत याचिकाकर्ता के आवेदन पर जानकारी देने के लिए कहा है।

छत्तीसगढ़ सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने 7 नवंबर 2006 को अधिसूचना जारी कर राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो को सूचना के अधिकार पर जानकारी देने से मुक्त किया था। इस अधिसूचना को आरटीआई एक्टिविस्ट राजकुमार मिश्रा ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने ईओडब्ल्यू को यह निर्देश भी दिया है कि आरटीआई कार्यकर्ता राजकुमार मिश्रा के 15 नवंबर 2016 में प्रस्तुत किए गए सूचना के अधिकार का आवेदन का जवाब आज की स्थिति में इस आदेश के चार सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को प्रदान करें।

इसके बाद जीएडी की इस अधिसूचना को आरटीआई कार्यकर्ता मिश्रा ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के खंडपीठ के समक्ष यह कहते हुए चुनौती दी थी कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 24 की उपधारा 4 में उल्लेख है कि भ्रष्टाचार और मानव अधिकारों के हनन से संबंधित सूचना देने से किसी भी संस्था को मुक्त नहीं किया जा सकता। छत्तीसगढ़ सरकार की यह संस्था छत्तीसगढ़ राज्य में भ्रष्टाचार से संबंधित प्रकरणों की ही जांच करती है। इस तरह इस संस्था को सूचना के अधिकार से मुक्त नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया था। हाईकोर्ट के नोटिस जारी करने पर राज्य सरकार ने इस रिट याचिका में जवाब प्रस्तुत किया गया।  हाईकोर्ट ने यह कहते हुए कि याचिकाकर्ता जनहित याचिकाएं प्रस्तुत करने के मामले में नए व्यक्ति नहीं है, इस कारण उनकी यह याचिका निरस्त की जाती है। इस पर राजकुमार मिश्रा ने  सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट उनकी याचिका पर हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि  वह इस प्रकरण को फिर से सुने। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के आधार पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने इस याचिका की सुनवाई बेंच तीन में की गई। इसमें जस्टिस संजय के अग्रवाल और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल ने याचिका को सुना और आदेश को 8 फरवरी 2024 को रिजर्व कर लिया गया। इस आदेश को 7 मार्च 2024 को खुली अदालत में जारी किया गया।

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