प्रीपेड स्मार्ट मीटर देंगे ज्यादा खपत और ज्यादा खर्च का तगड़ा झटका

रायपुर(realtimes) छत्तीसगढ़ में भी प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की तैयारी है। इन मीटराें के लगने से तय है कि यहां के उपभोक्ताओं काे भी ज्यादा खपत के साथ ज्यादा पैसे खर्च करने का तगड़ा झटका लगेगा। नए साल में यहां भी ये लगने लगेंगे। देश के पांच राज्यों बिहार, उप्र, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में ये मीटर लगने प्रारंभ हो गए हैं। इन राज्यों में सबसे ज्यादा 11 लाख मीटर बिहार में लगे हैं। यहां पर उपभोक्ता सबसे ज्यादा परेशान हैं। रिचार्ज कम समय में समाप्त होने के साथ ज्यादा खपत होने की शिकायतें आम हैं। उप्र में पहले पोस्टपेड मीटर लगाए गए थे, अब वहां सबको प्रीपेड किया जा रहा है। ईईएसएल कंपनी ने देश में अब तक 31 लाख मीटर लगाए हैं। कंपनी के जनसंपर्क अधिकारी का कहना है, नई योजना में शुरुआती शिकायत आम बात है। उसका निराकरण किया जा रहा है।केंद्र सरकार ने देश के हर राज्य में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने के निर्देश दिए हैं। इस योजना का प्रकाशन राजपत्र में किए जाने के कारण इनको लगाना हर राज्य के लिए जरूरी है। इसलिए अब छत्तीसगढ़ में भी इन मीटरों को लगाने की तैयारी है। इसके लिए केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद इस योजना में टेंडर किया गया है। फीडरों के साथ उपभोक्ताओं के कनेक्शनों में लगने वाले मीटरों का टेंडर इसी माह फाइनल हो जाएगा।
बिहार में उपभोक्ता त्रस्त
ईईएसएल कंपनी ने सबसे ज्यादा 11 लाख मीटर बिहार में लगाए हैं। यहां पर 25 लाख मीटर लगने हैं। यहां पर मीटर लगने के साथ ही उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई। यहां पर थोक में शिकायतें सामने आई हैं। इन शिकायतों में रिचार्ज का समय से पहले समाप्त होना, रिचार्ज कराने पर एक सप्ताह में ही समाप्त हो जाना, मीटर का जंप करना आम बात है। थोक में उपभोक्ताओं ने ये शिकायत भी की है कि उनका बिल पहले पांच से सात सौ आता था, लेकिन अब हजार से डेढ़ हजार आने लगा है। कुछ उपभोक्ता इस योजना से संतुष्ट भी हैं। संजीव कुमार ने बताया उनके घर और दुकानों में 11 मीटर लगे हैं, उनके सभी मीटर ठीक से काम कर रहे हैं।
मीटर की क्वालिटी पर सवाल
प्रदेश में पॉवर कंपनी से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है, जो कंपनी मीटर लगाने का काम ले रही है, वह कंपनी मीटर अच्छी क्वालिटी के नहीं लगाती है जिसके कारण परेशानी होती है। अगर मीटर अच्छी क्वालिटी के लगेंगे तो परेशानी नहीं होगी। लेकिन टेंडर में किसी खास कंपनी के मीटर न लगाने का उल्लेख होने के कारण कंपनियां मनमर्जी करती हैं।



