
राजीव धवन ने कहा कि, “मामला यह है कि मुफ्त रेवड़ियों की घोषणाएं तो राजनीतिक दल कर रहा है, ऐसे में क्या उस राजनीतिक दल या किसी नेता पर पाबंदी लगाई जाएगी जो घोषणाएं कर रहा है। इस तरह किसी पार्टी की मान्यता खत्म नहीं की जा सकती। इस समिति का चुनावी कानून पर असर और किसी भी दल या नेता की मान्यता खत्म करने का मुद्दा ही असली मुद्दा है।”
वहीं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवकता संजय हेगड़े ने भी लगभग इसी तरह की प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा,”अभी तो सिर्फ एक समिति बनाने की बात हो रही है। कोई रिपोर्ट तो अभी तक आई नहीं है। अधिकार क्षेत्र का मामला तब सामने आएगा जब सुप्रीम कोर्ट इस समिति की सिफारिशों पर कोई एक्शन लेगी। फिलहाल तो ऐसा लगता है कि समिति बनाकर मामले को दफ्न किया जा रहा है।”
उन्होंने कहा, “समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट के सामने मामले को बेहतर समझने का विकल्प होगा। इसके बाद ही कोर्ट तय कर पाएगा कि समस्या का क्या समाधान हो सकता है।”



