खास खबर: पीएम आवास होगा विधानसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा, भाजपा-कांग्रेस में अभी से जंग

रायपुर. प्रधानमंत्री आवास को लेकर भाजपा और कांग्रेस में जिस तरह की सियासत चल रही है, उससे तय हो गया है कि इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में यह बड़ा मुद्दा बनने वाला है। भाजपा ने मामले को इसको लेकर एक बड़ा आंदोलन का रूप देना प्रारंभ किया है। अब भाजपा इस मामले में 15 मार्च को विधानसभा का घेराव करने वाली है। भाजपा लगातार प्रदेश सरकार पर आरोप लगा रही है कि कांग्रेस सरकार ने 20 लाख गरीबों को आवास से वंचित किया है। इसका कांग्रेस भी लगातार करारा जवाब दे रही है।
भाजपा प्रधानमंत्री आवास को लेकर लंबे समय से मंडल से लेकर विधानसभा स्तर पर आंदोलन कर रही है। कांग्रेस विधायकों के घेराव के बाद अब भाजपा ने 15 मार्च को विधानसभा का घेराव करने का फैसला किया है। इसको लेकर भाजपा की बड़ी तैयारी चल रही है। बृजमोहन अग्रवाल का कहना है भाजपा ने मोर आवास मोर अधिकार आंदोलन चलाकर आवासहीनों की आवाज बुलंद की है। हम 8000 से अधिक पंचायतों तक पहुंचे हैं। 9 लाख परिवारों से मिलने पर 7 लाख से अधिक आवेदन एकत्रित हुए हैं। जिन्हें 15 मार्च को मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा।
साढ़े सात लाख मकान भाजपा सरकार ने बनाए
श्री अग्रवाल ने कहा, मुख्यमंत्री ने बजट भाषण में कहा, अब तक 8,42,289 आवास पूर्ण हुए हैं। 3,238 करोड़ का प्रावधान 2,30,000 नए आवास हेतु किया गया है। जबकि सत्य यह है कि दिसंबर 2018 में भूपेश सरकार बनी तब तक 3 वर्षों में 7,56,765 आवास स्वीकृत हो चुके थे और 7 लाख 56 हजार आवास भाजपा सरकार ने बना भी दिए थे। उन्होंने कहा, वर्तमान में 3238 करोड़ इस योजना हेतु बजट में रखा गया है जिसमें से 40 प्रतिशत अर्थात 1295 करोड़ मात्र ही प्रदेश सरकार द्वारा दिया जा रहा है शेष 60 फीसदी केंद्र सरकार का हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने राज्य के बजट में प्रधानमंत्री आवास शहरी हेतु कोई चर्चा नहीं की है जबकि –
शहरी क्षेत्रों में कोई पूर्व निर्धारित सूची नहीं है और कोई लिमिट भी नहीं है। अतः नगरीय निकाय द्वारा किए गए प्रस्ताव के सभी हितग्राही पात्र माने जाते हैं।
इस योजना में भी नहीं दे रहे राज्यांश
शहरों में प्रधानमंत्री आवास तीन नामों से संचालित है और इन तीनों के माध्यम से पात्र हितग्राहियों का जो प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है उसमें भी औसत 60 प्रतिशत की प्रतीक्षा सूची है जो पूरे प्रदेश में लगभग 4 लाख से अधिक है। और “मोर मकान मोर आस” योजना के अंतर्गत किराए से निवासरत आवासहीनों को 3.25 लाख रुपए देना पड़ रहा है जबकि भाजपा सरकार में ये 75 हजार हुआ करता था। इस योजना में केंद्र सरकार की राशि लगी हुई है परंतु राज्यांश नहीं दिया जा रहा है।
8.41 लाख आवास कांग्रेस ने बनाए -शुक्ला
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा, वर्तमान में राज्य में ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास के काम प्रगति पर है। मुद्दाविहीन भाजपा आम जनता से गलत फार्म भरवा कर लोगों को दिग्भ्रमित करने का काम कर रही है। प्रदेश में कुल शहरी और ग्रामीण मिलाकर कांग्रेस सरकार बनने के बाद 1,304,000 (तेरह लाख चार हजार) आवास स्वीकृत हुए है। प्रदेश में 10.57 लाख ग्रामीण क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास की मंजूरी हुई जिसमें 8.41 लाख आवास पूर्ण हो चुके है, शेष में कार्य प्रगति पर है। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में लगने वाली राज्यांश का पूर्ण भुगतान किया जा चुका है। इसी प्रकार शहरी क्षेत्र में 2 लाख 69 हजार मकान स्वीकृत हुए। प्रधानमंत्री आवास के शहरी क्षेत्र का ही यदि तुलनात्मक अध्ययन करे तो रमन सिंह सरकार ने 4 साल में शहरी क्षेत्र में मात्र 19,000 मकान बनाए थे तथा भूपेश सरकार ने 4 साल में 247,000 मकान बनाए हैं। रमन सरकार ने चार साल में मात्र 272 करोड़ रुपए का राज्यांश दिया था इसके विपरीत कांग्रेस सरकार ने 4 साल में 2100 करोड़ शहरी आवास में राज्यांश दिया है। मुख्यमंत्री ने बजट में भी प्रधानमंत्री आवास के लिए 3238 करोड़ का प्रावधान किया है। श्री शुक्ला ने कहा कि केंद्र सरकार अपना हिस्सा न देने पड़े इसलिए प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति में हमेशा कोताही बरतती है। प्रधानमंत्री आवास योजना में केंद्रांश और राज्यांश क्रमशः 60 प्रतिशत और 40 प्रतिशत है इसलिए इस योजना के क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार हमेशा अपने अंश को देने कोताही बरतती है।



