उपभोक्ता 18 लाख से हो गए 60 लाख से ज्यादा, अब बिजली भी सरप्लस

रायपुर(realtimes) छत्तीसगढ़ राज्य जब आज से 22 साल पहले बना था, तब बिजली के मामले में बहुत पीछे था। मप्र के भरोसे रहने के कारण बिजली काे लेकर भारी परेशानी हाेती थी, लेकिन अब ताे अपना राज्य स्थापना के 22 सालों में बिजली के मामले में सरप्लस राज्य बन गया है। आज की तारीख में स्थिति यह है कि यहां की बिजली से दूसरे राज्य भी रौशन हो रहे हैं। जहां एक तरफ बिजली के उपभोक्ता लगातार बढ़ रहे हैं, वहीं यहां पर लाइनों का विस्तार होने के साथ ही अन्य सुविधाओं का भी विस्तार किया गया है।
राज्य स्थापना के समय 2000 में राज्य में बिजली के मामले में ज्यादा सुविधाएं नहीं थीं। उत्पादन के मामले में यहां पर महज 1360 मेगावाट का ही उत्पादन होता था। लेकिन आज की स्थिति में यह उत्पादन 2980 मेगावाट हो गया है। मड़वा में जो 500 मेगावाट की दो यूनिट लगी है, उस यूनिट में जब करीब आठ साल पहले उत्पादन प्रारंभ हुआ था, तभी से उसकी बिजली तेलंगाना को देने का अनुबंध हो गया था। ऐसा इसलिए संभव हो सका, क्योंकि उत्पादन के मामले में राज्य सरप्लस हो गया था। आज की स्थिति में जहां अपना उत्पादन 2980 मेगावाट है, वहीं सेंट्रल सेक्टर से करीब साढ़े तीन हजार मेगावाट का शेयर मिलता है। ऐसे में राज्य में बिजली छह हजार मेगावाट से ज्यादा हो जाती है। जहां तक खपत का सवाल है तो औसत खपत चार हजार मेगावाट के आस-पास रहती है। कई बार गर्मी में खपत पांच हजार मेगावाट के पार हो जाती है, लेकिन इसके बाद भी बिजली की कमी नहीं होती है।
ये सुविधाएं भी बढ़ीं
उत्पादन बढ़ने के साथ ही उपभोक्ता भी बढ़े और कृषि पंपों के कनेक्शनों में भी भारी संख्या में इजाफा हुआ। इस समय करीब पांच लाख कृषि पंपों के कनेक्शन हैं, जबकि राज्य बनने के समय 73 हजार ही कृषि पंपों के उपभोक्ता थे। प्रदेश में पहले अति उच्च दाब के केंद्र महज 27 थे जो अब 129 हो गए हैं। इसी तरह से अति उच्च दाब की लाइन 5205 किलो मीटर थी जो अब 13610 किलो मीटर हो गई है। 33 और 11 केवी के 248 उपकेंद्र थे जो अब 1333 हो गए हैं। इसके लिए लाइन 6988 किलोमीटर थी जो अब 23863 किलोमीटर हाे गई है। बिजली के उपभोक्ता जो पहले 1899908 थे वो अब 60 55579 हो गए हैं।



