अगस्त में जुलाई से खपत 24 सौ मेगावाट तक घटी

रायपुर(realtimes) सावन में पिछले एक सप्ताह से लगातार बारिश होने और झड़ी लगने के कारण बिजली की खपत आधी हो गई है। जो खपत गर्मी में छह हजार मेगावाट के करीब चली गई थी वह तीन हजार से भी कम हो गई है। जुलाई के अंत में ही उमस के कारण बिजली की खपत 52 सौ मेगावाट पार हो गई थी, लेकिन अगस्त के पहले सप्ताह में लगातार बारिश के कारण खपत 24 सौ मेगावाट कम होकर 28 सौ मेगावाट तक चली गई। पीक आवर में जरूर खपत तीन हजार मेगावाट से ज्यादा हो रही है।
अगस्त का पहला सप्ताह पावर कंपनी के साथ बिजली के उपभोक्ताओं के लिए भी राहत लेकर आया है। इस सप्ताह लगातार बारिश होने के कारण उमस से जहां राहत मिली है, वहीं एसी और कूलरों का चलना बंद तो नहीं हुआ है, लेकिन बहुत कम हो गया है। इसकी वजह से बिजली की खपत भी बहुत कम हो गई है। इस समय खपत तीन हजार मेगावाट से कम हो रही है।
जुलाई में रिकॉर्ड खपत
आमतौर पर जुलाई के माह में उमस के कारण बिजली की खपत बढ़ जाती है। इस साल भी यही हुआ है। उमस के कारण बिजली की खपत लगातार ज्यादा हुई। जुलाई में खपत बढ़ती रही और माह के अंत में खपत 52 सौ मेगावाट के पार हो गई। मानसून के समय में बिजली की खपत लगातार बारिश होने पर चार हजार मेगावाट से भी कम हो जाती है। इस समय कृषि पंप न चलने से भी राहत रहती है। कृषि पंपों पर ही हर रोज करीब सात सौ मेगावाट बिजली लग जाती है।
संयंत्रों में भरपूर कोयला
मानसून के लिए उत्पादन संयंत्रों में कम से कम 15 दिनों का स्टॉक रखना पड़ता है। कई बार बारिश में जब खदानों में पानी भर जाता है तो कोयला नहीं मिल पाता है। ऐसे समय में बिजली का उत्पादन प्रभावित हो जाता है। यही वजह है कि पावर कंपनी बारिश से पहले जितना ज्यादा से ज्यादा स्टॉक संभव होता है, वह अपने संयंत्रों रखने का काम करती है। स्टॉक को देखते हुए अब खदानों में पानी भरा तो भी परेशानी होने वाली नहीं है। पावर कंपनी के कोरबा वेस्ट में 120 मेगावाट के चार और पांच सौ मेगावाट की एक यूनिट है। इस संयंत्र में एसईसीएल की खदान से कोयला सीधे कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से आता है। यही वजह है कि यहां के संयंत्र में परेशानी नहीं होती है। इस संयंत्र में आमतौर पर एक सप्ताह का कोयले का स्टॉक पर्याप्त माना जाता है। इस समय यहां पर इतने दिनों का ही स्टॉक है। पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी संयंत्र में 250 मेगावाट की दो यूनिट है। इसमें रोज 8 हजार टन कोयला लगता है। इस संयंत्र में भी भरपूर स्टॉक है। मड़वा में 500 मेगावाट की दो यूनिट है। यहां पर कोयला पॉवर कंपनी की खुद की गारे पेलमा की खदान से आता है। यहां पर रोज 15 हजार टन कोयला लगता है। यहां भी पर्याप्त स्टॉक है।



