INSAT-3DS Satellite Image: पूर्वी भारत में बारिश, दिल्ली-NCR में भी बौछार के संकेत

नई दिल्ली. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और इसरो के INSAT-3DS सैटेलाइट से ली गई थर्मल इन्फ्रारेड तस्वीर में देश के बड़े हिस्से पर घने मॉनसूनी बादल दिखाई दिए हैं। तस्वीर में मध्य भारत से लेकर गंगा के मैदानी इलाकों, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों तक बादलों की मोटी पट्टी नजर आ रही है। मौसम की यह स्थिति बताती है कि मॉनसून अभी सक्रिय है, लेकिन इसकी तीव्रता और फैलाव पूरे देश में एक जैसा नहीं है।
सैटेलाइट तस्वीर में कहां दिख रहे हैं घने बादल
INSAT-3DS की तस्वीर में मध्य भारत और आसपास के इलाकों के अलावा बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों के ऊपर घने बादल दिखाई दे रहे हैं। मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में भी बादली गतिविधि साफ नजर आती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह का बादलों का पैटर्न निम्न दबाव वाले सिस्टम और मॉनसून की धाराओं के आपसी मेल से बनता है।
गहरी संवहन प्रक्रिया से भारी बारिश का संकेत
तस्वीर में दिख रहे घने बादल गहरी संवहन प्रक्रिया से जुड़े हैं। इसमें हवा तेजी से ऊपर उठती है। इससे भारी बारिश और गरज-चमक वाले तूफान बन सकते हैं। हालांकि, इस गतिविधि का असर हर जगह एक जैसा नहीं होगा। किसी इलाके में तेज बारिश हो सकती है, जबकि आसपास के क्षेत्रों में सिर्फ बादल छाए रह सकते हैं।
पूर्वी भारत में सितंबर तक बारिश के कई दौर
सितंबर के पहले दो हफ्तों तक पूर्वी भारत में मध्यम से भारी बारिश के कई दौर आने का अनुमान है। जिन क्षेत्रों में निम्न दबाव के सिस्टम सक्रिय होंगे, वहां स्थानीय स्तर पर तेज बौछारें पड़ सकती हैं। पहले से गीली मिट्टी वाले जिलों में इससे बाढ़ और जलभराव का खतरा बढ़ सकता है।
पहले से गीली मिट्टी वाले जिलों में इससे बाढ़ और जलभराव का खतरा बढ़ सकता है।
पूरे देश में एक जैसी नहीं रहेगी मॉनसून की सक्रियता
मॉनसून अब देश के सभी हिस्सों में समान रूप से सक्रिय नहीं है। पूर्वी भारत में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है, जबकि उत्तर-पश्चिम, पश्चिमी और दक्षिणी भारत के बड़े हिस्सों में मौसम अपेक्षाकृत सूखा रह सकता है।
इस असमानता का असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकता है। पूर्वी हिस्सों में नदियों का जलस्तर बढ़ने की स्थिति बन सकती है, जबकि पश्चिम और दक्षिण के कुछ हिस्सों में किसान सूखे की चिंता से प्रभावित हो सकते हैं।
मौसम मॉडल के अनुसार, यह क्षेत्रीय अंतर अगले कुछ दिनों तक बना रह सकता है। इससे कृषि, जल प्रबंधन और शहरी जीवन पर अलग-अलग असर पड़ सकता है।
दिल्ली-NCR में स्थानीय बारिश की संभावना
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी छिटपुट बारिश के संकेत हैं। दिन के दौरान बनने वाले बादल और स्थानीय संवहन गतिविधि दोपहर बाद या शाम को बौछार और गरज के साथ बारिश ला सकती है।
इस तरह की बारिश काफी स्थानीय होती है। एक इलाके में तेज बारिश हो सकती है, जबकि कुछ दूरी पर केवल बादल छाए रह सकते हैं। ऐसे में दिल्ली-NCR के लोगों को मौसम के ताजा अपडेट पर नजर रखने और जलभराव वाले इलाकों से बचने की सलाह दी गई है।



