कांग्रेस में मुख्यमंत्री के भूपेश ही दावेदार, भाजपा में थाेक में दावेदार - realtimes
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कांग्रेस में मुख्यमंत्री के भूपेश ही दावेदार, भाजपा में थाेक में दावेदार

रायपुर . छत्तीसगढ़ की जनता ने किसे सरकार बनाने का माैका दिया है, इसका खुलासा ताे तीन दिसंबर काे मतगणना के बाद हाेगा, लेकिन जहां तक मुख्यमंत्री के नाम काे लेकर दावेदारों का सवाल है ताे कांग्रेस में एक ही नाम भूपेश बघेल का चल रहा है। राहुल गांधी ने भी उनके ही नाम का ऐलान किया है, लेकिन जहां तक भाजपा का सवाल है ताे  मुख्यमंत्री के लिए आधा दर्जन से ज्यादा दावेदारों के नाम चर्चा में हैं।
छत्तीसगढ़ में विधानसभा का चुनाव दो चरणों में हो चुका है। अब तीन दिसंबर को नतीजा सामने आएगा। इसके पहले दावों का दौर चल रहा है। भाजपा लगातार यह दावा कर रही है कि मोदी की गारंटी के दम पर भाजपा की सरकार बनने वाली है। इसी के साथ इस बात के भी कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा की सरकार बनी तो मुख्यमंत्री कौन होंगे।

भूपेश फिर बनेंगे मुख्यमंत्री

कांग्रेस की सरकार वापस बनती है ताे इसमें संदेह नहीं है कि एक बार फिर से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ही बनेंगे। यह बात अलग है कि उनके चेहरे पर खुलकर चुनाव नहीं लड़ा गया है, लेकिन उनके नाम का ऐलान खुद राहुल गांधी ने किया है, इसके बाद किसी भी तरह का संदेह नहीं है।

रमन के सामने बड़ी चुनौती
प्रदेश में जब पहली बार 2003 में भाजपा की सरकार बनी थी, तब डॉ. रमन सिंह के सामने ज्यादा चुनौती नहीं थी, दो ही नाम और थे जिनको मुख्यमंत्री का दावेदार माना गया था। इनमें पहला और दमदार नाम दिलीप सिंह जूदेव का था। अगर उनकी उस समय में ऐ पैसे तू खुदा तो नहीं लेकिन खुदा से कम नहीं, वाली सीडी नहीं आती तो वे ही मुख्यमंत्री होते। लेकिन उनकी सीडी के कारण डॉ. रमन सिंह को मुख्यमंत्री बनने का मौका मिल गया। डा. रमन के अलावा रमेश बैस का नाम भी मुख्यमंत्री के दावेदार के रूप में था। लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने डॉ. रमन को कमान सौंपी। 15 साल मुख्यमंत्री रहने के बाद अब पांच साल के बाद जब एक बार फिर से डॉ. रमन की दावेदार है तो उनके सामने इस बार आधा दर्जन से ज्यादा दावेदार हैं।
अरुण साव की बड़ी दावेदारी
मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेशाध्यक्ष अरुण साव की बड़ी दावेदारी है। 2003 में जिस तरह से डा. रमन सिंह को प्रदेशाध्यक्ष बनाकर केंद्रीय नेतृत्व ने सरकार बनाने की जिम्मेदारी दी थी और चुनाव जीतने पर उनको मुख्यमंत्री बनाया गया, उसी तरह से इस बार अरुण साव को जिम्मेदारी मिली है और उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया है। इसी के साथ श्री साव ओबीसी हैं। भाजपा ओबीसी पर बड़ा दांव खेल रही है। ऐसे में उनको भी मुख्यमंत्री की कमान सौंपी जा सकती है। प्रधानमंत्री ने अपने छत्तीसगढ़ प्रवास में लगातार उनको अपने साथ रखकर एक संदेश भी दिया है।
साय-नेताम दो आदिवासी चेहरे
पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदेव साय एक बड़ा आदिवासी चेहरा हैं। उनके नाम से भी केंद्रीय मंत्री अमित ने कहा है, उनको जीत दिलाएं मैं उनको बड़ा आदमी बना दूंगा। ऐसे में उनकी भी मुख्यमंत्री के लिए दावेदारी है। एक और बड़े आदिवासी नेता पूर्व राज्यसभा सांसद और प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री रामविचार नेताम का नाम भी दावेदारों में हैं। उनके नाम पर भी मुहर लग सकती है।
जीते तो विजय बघेल भी होंगे बड़े दावेदार
दुर्ग के सांसद विजय बघेल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ चुनाव लड़ा है, अगर उनको जीत मिल जाती है तो उनका वैसे ही दावा बड़ा हो जाएगा। इसी के साथ वे ओबीसी वर्ग के भी हैं और कुर्मी समाज के भी हैं। कांग्रेस ने भी ओबीसी कार्ड खेलकर भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री बनाया था। ऐसे में विजय बघेल भी मुख्यमंत्री बन सकते हैं।

चौधरी-चंदेल ने नाम भी

पूर्व आईएएस ओपी चौधरी पर केंद्रीय नेतृत्व बहुत मेहरबान है। अमित शाह ने रायगढ़ की सभा में कहा था, आप ओपी चौधरी को जीत दिलाए, इनको बड़ा आदमी बनाने की जिम्मेदारी मेरी। अब बड़े आदमी का आशय यह भी लगाया जा रहा है कि श्री चौधरी को भी मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। इसी के साथ ओबीसी होने के नाते नेता प्रतिपक्ष नारायण सिंह चंदेल का भी दावा मुख्यमंत्री के पद को लेकर है।

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